टोपीवाला और बंदर Topiwala aur Bander ki Kahani

टोपीवाला और बंदर Topiwala aur Bander ki Kahani

टोपीवाला और बंदर Topiwala aur Bander ki Kahani
टोपीवाला और बंदर Topiwala aur Bander ki Kahani

यह कहानी एक टोपीवाले के चतुराई को दिखता है की वह किस तरह अपनी टोपी बंदरों से वापस लेता है.

Tटोपीवाला और बंदर Topiwala aur Bander ki Kahani

एक व्यापारी था। वह हमेशा शहर में जाकर सामान खरीदता और अपने गाँव के बाजार में बेच कर पैसे कमाता था। इस प्रकार वह बाजार से सामान खरीदता और बेच दिया करता। इससे उसको फायदा होता और वह बहुत खुश रहता। एक दिन वह सामान खरीदने के लिए शहर में गया तथा उसने बहुत सी टोपियाँ खरीदी।

रास्ते में चलते चलते वह बहुत ही थक गया। चलते -चलते उसे अचानक एक घना वृक्ष दिखाई दिया। उसने सोचा क्यों न थोड़ा इस वृक्ष के नीचे विश्राम कर लिया जाय? यह सोचकर उसने अपना टोपियों से भरा थैला पेड़ के नीचे रखा और विश्राम करने लगा। विश्राम करते -करते उसे नींद लग गयी। वह गहरी नींद में सो रहा था।

जब उसकी नींद टूटी तो उसने अपना टोपियों का थैला अपने पास न पाकर वह बहुत दुखी हुआ। फिर उसने देखा कि उसकी सारी टोपिया उसी वृक्ष पर बैठे सारे बंदरो ने पहन रखी थी यह देखकर उसे बहुत ही क्रोध आया।

उसने बंदरो से कहा मेरी सारी टोपिया मुझे वापस कर दो परन्तु बन्दर उछल कूद कर टोपीवाला का साडी टोपी यहाँ वहां फेंक कर खेल रहे थे. तब टोपीवाले ने बंदरों को पत्थर मारे तब उसके बदले बंदर उसे पेड़ पर लगे फल तोड़कर फेंकने लगे. टोपीवाला हाथ ऊपर कर चिल्लाता तो बंदर भी हाथ ऊपर कर लेते. टोपीवाला अंत में अपना हाथ अपने सर पर रखा तो बंदर भी उसकी नक़ल कर अपना हाथ सर पर रख लिए.

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यह सारी बाते टोपीवाले को समझते देर न लगी वह समझ गया की बंदर उसके नकल कर रहे थे. उसके बाद टोपीवाले ने उसी तरह से बंदर को अपनी इशारों पर उसकाया, टोपीवाला अपना सर खुजलाता तो बंदर भी अपना सर खुजलाते. टोपीवाला इधर उधर जाता तो बंदर भी इधर उधर जाने लगता.

तब अंत में टोपीवाला अपना टोपी सर से उतार कर नीचे फेंका तो बंदर भी यह देख अपनी टोपी सभी बंदरो ने अपनी- अपनी टोपिया भी निकालकर जमीन पर फेक दिया। जमीन पर पड़े टोपियों को देखकर व्यापारी बहुत खुश हुआ। उसने सारी टोपियां एक जगह जमा किया और खुशी- खुशी घर लौट गया।

टोपीवाला और बंदर Topiwala aur Bander ki Kahani

सीख: टोपीवाला और बंदर Topiwala aur Bander ki Kahani इस कहानी में बताया गया की यदि मुसीबत पड़े तो उसका सामना डट करना चाहिए. पीछे हटने से सिर्फ और सिर्फ नुकसान ही उठाना पद सकता है. जिस तरह से टोपीवाला अंत समय तक हार नहीं माना हमें भी आखिरी तक कोशिश करते रहना चाहिए.

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