दीपावली दीपों का त्यौहार Dipawali Festival

दीपावली दीपों का त्यौहार Dipawali Festival

दीपावली दीपों का त्यौहार Dipawali Festival देशभर में दिवाली का पर्व आज धूमधाम से मनाया जा रहा है। धनतेरस से लेकर भैया दूज तक चलने वाला ये पांच दिन का त्योहार का इतिहास बहुत पुराना है। दिवाली का पर्व ना केवल भारत में बल्कि दुनिया के कई देशों में धूमधाम से मनाया जाता है। इस त्योहार का ना केवल महत्व ही है बल्कि इतिहास भी है। दिवाली के दिन ना केवल श्रीराम अयोध्या लौटे थे बल्कि इस दिन मां दुर्गा ने काली का रूप लिया था, भगवान महावीर को मोक्ष की प्राप्ति की प्राप्ति हुई थी। दिवाली के दिन ही पांडव अपने वनवास और अज्ञातवास से वापस लौटे थे। आइए जानते हैं दिवाली के इतिहास के बारे में…

Why Dipawali celebrated?

When celebrate Dipalwali?

How celebrated Dipawali?

What is the scientific reason for celebrating Diwali?

What is the story of Diwali?

दीपावली दीपों का त्यौहार Dipawali Festival
दीपावली दीपों का त्यौहार Dipawali Festival

१. श्री राम अयोध्या लौटने पर पुरे अयोध्या को दीपों से सजा दिया गया था

रामायण से जुड़ी गाथाओं के अनुसार, त्रेता युग में कार्तिक मास की अमावस्या के दिन माता सीता और लक्ष्मण के साथ भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या वापस आए थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर मिठाई बांटी थी। श्रीराम की वापसी की खुशी में हर साल इस दिन दीप जलाकर और मिठाइयां बांटकर उत्सव मनाया जाता है।

दिवाली के कुछ दिन बाद छठ पूजा :

छठ पूजा बिहार के त्यौहार में सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है. इस अब न की बिहार में बलिक इसे भारत के दुसरे राज्यों में भी मनाने लगे है. यहाँ तक की अब विदेशों में भी इस त्यौहार को मनाते है. क्यूंकि बिहार से जो लोग देश विदेश के दुसरे स्थानों पर बस गए है वह अपनी संस्कृति और परंपरा को कायम रखे है. और इस लिए वे इसे मानते है.

छठ पूजा के दिन सूर्य की पूजा की जाती है. इस मनाने के भी अलग अलग कारण है उनमे से एक है ….

दीपावली दीपों का त्यौहार Dipawali Festival से जुड़ा सूर्य उपासना का महापर्व छठ भी श्रीराम से जुड़ा है। एक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम और माता सीता ने रावण वध के बाद कार्तिक शुक्ल षष्ठी को उपवास रख कर सूर्यदेव की आराधना की थी। इसके अगले दिन यानी सप्तमी को उगते सूर्य की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त किया था।

Chhath Pooja
Chhath Pooja

२. दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन एक वजह :

कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही माता लक्ष्मी क्षीर सागर से प्रकट हुई थीं। इसीलिए इस दिन इनकी पूजा की जाती है। इसलिए इस दिन लोग घरों को सजाते हैं और मां लक्ष्मी का स्वागत कर उनकी पूजा की जाती है। माना जाता है कि दिवाली की रात लक्ष्मी-विष्णु विवाह भी हुआ था।

३. दिवाली के दिन पांडव वनवास पूरा कर लौटे थे…

महाभारत के अनुसार, जब कौरव और पांडव के बीच चौसर का खेल हुआ तो इसमें पांडव सब कुछ हार गए थे। तब पांडवों को वनवास और अज्ञातवास भोगना पड़ा था। वनवास और अज्ञातवास पूरा होने के बाद पांडव दिवाली के दिन ही वापस लौटे थे। उनके लौटने की खुशी में नगरवासियों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था। इसलिए इसे दीपावली दीपों का त्यौहार Dipawali Festival कहा जाता है.

४. दीवाली को विज्ञान से जोड़कर देखना …

कुछ तो लोग यह भी कहते है की दिवाली – दीपावली दीपों का त्यौहार Dipawali Festival से बरसात के बाद होने वाली बीमारी जैसे मलेरिया, डेंगू, कम हो सकता है. तीन से चार महीने लगातार बरसात होने से जगह जगह बरसात का पानी जमा हो जाता है, जिससे मच्छर मखिया , कीटक पनपने लगते है. जो एक जान लेवा बीमारी का कारण बनता है. दीपावली में दिए जलाने, घरों और आस पास की साफ सफाई करना, और पटाखे के रासायनिक धुंए से ये कीटक नष्ट हो जाते है.

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दीपावली दीपों का त्यौहार Dipawali Festival

दीपावली का यह त्यौहार हर्षोल्लास, खुशियाँ लेकर आती है. लोगो में आपासी भाईचारा बढ़ता है. गली मोहल्ले में रौनक छाई रहती है. लोगो के घरों में तरह तरह के पकवान बनाये जाते है. घरों को सजाया जाता है, साफ सुथरा किया जाता है, घरों के बाहर रंगोली बनाई जाति है, जिससे घर के बाहर एक रौनक सी छा जाति है. बाजारों में नई चहल पहल रहता है. दिवाली, भारत देश में मनाया जाने वाला सबसे बडा़ त्यौहार है। दिवाली को पूरे भारत में खूब धूम धाम से मनाते हैं। आपको बता दें कि दिवाली सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि भारत के बाहर रहने वाले भारतीय और अन्य लोग भी बहुत धूम धाम से मनाते हैं।

दीपावली दीपों का त्यौहार Dipawali Festival के इस विशेष त्योहार के लिए हिंदू धर्म के लोग बहुत उत्सुकता से इंतजार करते हैं। यह बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए हर किसी का सबसे महत्वपूर्ण और पसंदीदा त्यौहार है। दीवाली भारत का सबसे महत्वपूर्ण और मशहूर त्यौहार है। जो पूरे देश में साथ-साथ हर साल मनाया जाता है। रावण को पराजित करने के बाद, 14 साल के निर्वासन के लंबे समय के बाद भगवान राम अपने राज्य अयोध्या में लौटे थे। लोग

आज भी इस दिन को बहुत उत्साहजनक तरीके से मनाते हैं। भगवान राम के लौटने वाले दिन, अयोध्या के लोगों ने अपने घरों और मार्गों को बड़े उत्साह के साथ अपने भगवान का स्वागत करने के लिए प्रकाशित किया था। यह एक पवित्र हिंदू त्यौहार है जो बुरेपन पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह सिखों द्वारा भी मुगल सम्राट जहांगीर द्वारा ग्वालियर जेल से अपने 6 वें गुरु, श्री हरगोबिंद जी की रिहाई मनाने के लिए मनाया जाता है।

दीपावली दीपों का त्यौहार Dipawali Festival दिन बाजारों को एक दुल्हन की तरह रोशनी से सजाया जाता है ताकि वह इससे एक अद्भुत त्यौहार दिख सके। इस दिन बाजार बड़ी भीड़ से भरा होता है, विशेष रूप से मीठाई की दुकानें। बच्चों को बाजार से नए कपड़े, पटाखे, मिठाई, उपहार, मोमबत्तियां और खिलौने मिलते हैं। लोग अपने घरों को साफ करते हैं और त्योहार के कुछ दिन पहले रोशनी से सजाते हैं। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार सूर्यास्त के बाद लोग देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं।

वे अधिक आशीर्वाद, स्वास्थ्य, धन और उज्जवल भविष्य पाने के लिए भगवान और देवी से प्रार्थना करते हैं। वे दीपावली दीपों का त्यौहार Dipawali Festival के सभी पांच दिनों में खाद्य पदार्थों और मिठाई के स्वादिष्ट व्यंजन बनाते हैं। लोग इस दिन पासा, कार्ड गेम और कई अन्य प्रकार के खेल खेलते हैं। वे अच्छी गतिविधियों के करीब आते हैं और बुरी आदतों को दूर करते हैं।

पहले दिन धनतेरस या धन्त्ररावदाशी के रूप में जाना जाता है जिसे देवी लक्ष्मी की पूजा करके मनाया जाता है। लोग देवी को खुश करने के लिए आरती, भक्ति गीत और मंत्र गाते हैं। दूसरे दिन नरका चतुर्दशी या छोटी दिवाली के रूप में जाना जाता है जिसे भगवान कृष्ण की पूजा करके मनाया जाता है क्योंकि उन्होंने राक्षस राजा नारकसुर को मार डाला था।  तीसरे दिन मुख्य दिवाली दिवस के रूप में जाना जाता है जिसे शाम को रिश्तेदारों, दोस्तों, पड़ोसियों और जलती हुई फायर क्रैकर्स के बीच मिठाई और उपहार वितरित करते हुए देवी लक्ष्मी की पूजा करके मनाया जाता है।

चौथे दिन भगवान कृष्ण की पूजा करके गोवर्धन पूजा के रूप में जाना जाता है। लोग अपने दरवाजे पर पूजा करके गोबर के गोवर्धन बनाते हैं। पांचवें दिन यम द्वितिया या भाई दौज के रूप में जाना जाता है जिसे भाइयों और बहनों द्वारा मनाया जाता है। बहनों ने अपने भाइयों को भाई दौज के त्यौहार का जश्न मनाने के लिए आमंत्रित करती हैं।


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