होली पर निबंध Essay on Holi

होली पर निबंध Essay on Holi

होली पर निबंध Essay on Holi
होली पर निबंध Essay on Holi

होली की धूम

होली वसंत का एक उत्सव है। होली को अतिरिक्त रूप से वसंत का युवा कहा जाता है। प्रकृति सरसों की पीली साड़ी पहनकर किसी की राह देखती हुई प्रतीत होती है। दरअसल, हमारे पूर्वजों में भी, होली के उत्सव को प्रेम की छवि के रूप में देखा जाता है। अभी, सभी इसमें सभी छोटे-बड़े लोग पुरानी अलगाव, दुश्मनी, भेदभाव की अनदेखी करते हैं। होली रंगो का उत्सव है और रंग खुशी का पर्याय हैं। बसंत के मौसम में प्रकृति की भव्यता बहुत प्यारी है।

किशोरावस्था में जब प्रकृति पूरी तरह से भीग जाती है, तो आदमी उसी तरह खुशी से झूमने लगता है। होली का उत्सव इसी की छवि है। इस खूबसूरत उत्सव के दौरान, पूरा वातावरण अद्भुत हो जाता है। होली के उत्सव की प्रशंसा करने के लिए, यह दिन स्कूलों, विश्वविद्यालयों और कार्यस्थलों में एक प्रशासन अवसर है।

होली पर निबंध Essay on Holi

मुस्लिमों के लिए ईद के उत्सव के समान, क्रिसमस का उत्सव जो ईसाइयों के लिए महत्वपूर्ण है, उसी तरह हिंदुओं के लिए, होली के उत्सव में असाधारण केंद्रीयता है। होली का उत्सव तब से बहुत प्रसिद्ध हो गया है क्योंकि यह उत्सव भारत के साथ-साथ विदेशों में भी प्रसिद्ध है। भारत के अलावा, वर्तमान में लोग कई देशों में होली उत्सव मना रहे हैं।

वसंत की उपस्थिति: वसंत में, जब प्रकृति के उपांगों में यौवन टूट जाता है, तो होली का उत्सव इसे सुशोभित करने के लिए आता है। होली एक कस्टम उत्सव है। होली को सर्दियों के समापन और गर्मियों की शुरुआत के उत्सव के रूप में जाना जाता है, जो इन दो मौसमों को एकजुट करता है। सर्दियों की समाप्ति के बाद, श्रमिक व्यक्ति आनंदित हो जाते हैं। उनके कठिन कार्य का पूरा वर्ष प्रभावी होता है और उनका संग्रह परिपक्व होने लगता है।

होली को क्यों मनाया जाता है?

इसी तरह होली के उत्सव को होलिकोत्सव कहा जाता है। होलिका शब्द का उपयोग कर होली का निर्माण किया जाता है। होलिका शब्द संस्कृत के होल्क से लिया गया है, जिसका अर्थ है नकली अनाज। प्राचीनकाल में जब किसान अपनी नई फसल काटता था तो सबसे पहले देवता को भोग लगाया जाता था इसलिए नवान्न को अग्नि को समर्पित कर भूना जाता था। उस भुने हुए अन्न को सब लोग परस्पर मिलकर खाते थे। इसी ख़ुशी में नवान्न का भोग लगाने के लिए उत्सव मनाया जाता था। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में इस परम्परा से होली के त्योहारों को मनाया जाता है।

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होली के त्योहार के पीछे एक दिलचस्प कहानी है जिसका अविश्वसनीय महत्व है। यह उत्सव पुराने अवसरों में राजा हिरण्यकश्यप और उसकी बहन होलिका के प्रेम और हिरण्यकश्यप के बच्चे प्रह्लाद के प्रति समर्पण के साथ शुरू हुआ। हिरण्यकश्यप को ब्रह्मा द्वारा आश्रय के रूप में कई सेनाएँ मिली थीं, जिनकी गुणवत्ता के आधार पर वह अपने प्रजा का स्वामी बनगया।

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कहा जाता है कि भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु का नाम लेते थे। प्रह्लाद के पिता ने उसे भगवान का नाम लेने से रोक दिया क्योंकि वह खुद को भगवान के रूप में देखता था। प्रह्लाद को यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रहा था। भगवान की सुंदरता के कारण प्रह्लाद को कई अनुशासन दिए गए थे, लेकिन उन विषयों में से हर एक को बहुत पसंद किया गया था।

हिरण्यकश्यप की एक बहन थी जिसका नाम होलिका था। होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि उसे अग्नि जला नहीं सकती थी। होलिका अपने भाई के आदेश पर होलिका ने प्रह्लाद को अपनी गोद में लिया और आग पर बैठ गई। भगवान की भव्यता के परिणामस्वरूप, होलिका उस अग्नि में समा गई, हालांकि प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ। नतीजतन इसी दिन होलिका दहन किया जाता है।

भगवान कृष्ण से पहले, होलिका को भस्म कर इस उत्सव की विशेष रूप से प्रशंसा की गई थी, हालाँकि भगवान कृष्ण ने इसे उत्सव के उत्सव में बदल दिया। शासक कृष्ण ने दुष्ट राक्षसी का वध किया जो होली के अवसर पर अपने घर गए थे। बाद में उन्होंने इस उत्सव को रासलीला खेलने और गोप-गोपियों के साथ मिलाने के उत्सव के रूप में सराहा। उस समय से, दिन के समय रंग खेलने और शाम के समय होली जलाने का एक रिवाज बन गया था।

मौज मस्ती खुशियों का त्यौहार होली : होली पर निबंध Essay on Holi

होली के आगमन पर के एक दिन पहले होलिका जलाई जाती, किसी चौराहे अथवा आँगन में कुछ लकड़ियों के गट्ठर को जमीन में गाड़ा जाता है उसके बाद उसकी पूजा की जाती है. लोगो होलिका की पूजा करते है. उसके बाद उसे जला देते है. लोगो इसे बड़े ही मजे से इसके चोरन और घुमघुम कर नाचते है और मजे करते है. होली दो दिन का त्यौहार होता है। होली की तैयारियां कई दिन पहले से ही शुरू हो जाती हैं। होली से पहली रात को होलिका दहन किया जाता है

जिस पर घमंड और नकारात्मक प्रवृति का आहुति स्वरूप दहन किया जाता है। होलिका दहन से अगली सुबह फूलों के रंगों से खेलते हुए होली का शुभारम्भ किया जाता है। इस दिन को धुलेंडी भी कहा जाता है। इस दिन लोग एक-दुसरे पर रंग, गुलाल डालते हैं। होली को सभी लोग रंग-बिरंगे गुलाल और पानी में रंगों को घोलकर पिचकारियों से एक-दुसरे के उपर रंग डालकर प्रेम से खेलते हैं।

सडकों पर बच्चों, बूढों, लडकियों और औरतों की टोलियाँ गाती, नाचती, गुलाल मलती और रंग भरी पिचकारी छोडती हुई देखी जाती हैं। सबकों के दिलों में प्रसन्नता छाई रहती है। सारे देश में लोग अपनी-अपनी परम्परा से होली मनाते हैं, परन्तु सभी रंग द्वारा अपनी खुशी की अभिव्यक्ति करते हैं। छोटे बच्चे बड़ों को उनके पैरों में गुलाल डालकर प्रणाम करते हैं और बड़े छोटों को गुलाल से टिका लगाकर आशीर्वाद देते हैं। सभी लोग अपने प्रियजनों के घर जाकर तरह तरह के कुछ तीखे कुछ मीठे पकवान खाते हैं और बधाईयाँ देते हैं। सच में बड़े क्या क्या सभी होली के इस त्यौहार में रंग जाते है.

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