खुद को आइना दिखाना Khud ko aaina dikhana

खुद को आइना दिखाना Khud ko aaina dikhana

खुद को आइना दिखाना Khud ko aaina dikhana
खुद को आइना दिखाना Khud ko aaina dikhana

यह कविता खुद को कमजोर समझ हाथ पर हाथ रखे जो खुद को बर्बाद करते रहते है. अपना कीमती समय बेकार कि सोच में बर्बाद करते है वैसे लोगो के लिए है.

खुद को आइना दिखाना Khud ko aaina dikhana motivational poems for success

औकात ही इतनी है कि क्या कर सकते है,
बैठकर खुद को कोस सकते है।
बैठकर खुद पर हस सकते है।
कभी सोचा कि कमी कहाँ रह गई
कभी सोचा कुछ और भी कर सकते है थे
पर कमबख्त औकात ही इतनी है कि क्या कर सकते है,

तू यू हँसकर खुद को ज्ञानी समझ रहा है
दो पल की सोच लगता है खुदा तेरी ले रहा है।
आज तू सोचेगा क्या नंबर आये है
क्या कभी तू सोचा है तेरा कभी नंबर भी आएगा।
पर कमबख्त औकात ही इतनी है कि क्या कर सकते है,

याद रख जो मजे तू आज इस वक्त ले रहा है
वक्त भी तेरे मजे उस वक्त ले रहा होगा
सोच के मेहरबान वक्त पे हो रहा होगा
एक वक्त आएगा तू वक्त से हैरान हो रहा होगा।
पर कमबख्त औकात ही इतनी है कि क्या कर सकते है,

Written by : Ramesh Kahar,

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धन्यवाद!

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