Samas in hindi aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran समास व उसके प्रकार हिंदी व्याकरण

Samas in hindi aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran

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Samas in hindi aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran समास व उसके प्रकार हिंदी व्याकरण
Samas in hindi aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran समास व उसके प्रकार हिंदी व्याकरण

Samas in hindi aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran

समास ६ प्रकार के होते है. जिसे हम “अब तक दादा” शब्द से याद रख सकते है.

दो या दो से अधिक शब्दों का परस्पर संबंध बताने वाले शब्दों अथवा प्रत्ययों का लोप होने पर उन दो या अधिक शब्दों में से जो एक स्वतंत्र शंड बनता है, इसे सामासिक शब्द कहते है.

  • रसोई के लिए घर = रसोईघर
  • हाथ के लिए कड़ी = हथकड़ी
  • नील और कमल = नीलकमल
  • राजा का पुत्र = राजपुत्र

Samas In hindi – grammar in hindi

समास के भेद (samas ke bhed)

  • अव्ययीभाव समास (Adverbial Compound)
  • तत्पुरुष समास (Determination Compound)
  • कर्मधारय समास (Oppositional Compound)
  • द्विगु समास (Numeral Compound)
  • द्वन्द समास (Copulative Compound)
  • बहुव्रीहि समास (Attributive Compound)

प्रयोग की दृष्टि से समास के भेद-

  1. संयोगमूलक समास
  2. आश्रयमूलक समास
  3.  वर्णनमूलक समास 

पदों की प्रधानता के आधार पर वर्गीकरण- 

  1. पूर्वपद प्रधान – अव्ययीभाव 
  2. उत्तरपद प्रधान – तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु 
  3. दोनों पद प्रधान – द्वंद्व 
  4. दोनों पद अप्रधान – बहुव्रीहि (इसमें कोई तीसरा अर्थ प्रधान होता है)

अ- अव्ययी भाव समास Samas In Hindi – grammar in hindi

अव्ययी भाव समास में पहला शब्द अव्यय का बोध करता है. और ज्यादातर आप देखेंगे इसमें “यथा, प्रति, अति” जैसे शब्द मिलेंगे ऐसे शब्दों को अव्ययी भाव समास कहते है.

जैसे : यथाशक्ति, यथाभक्ति, प्रतिदिन, प्रत्येक, आदि

  • यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार
  • यथाक्रम = क्रम के अनुसार
  • यथानियम = नियम के अनुसार
  • प्रतिदिन = प्रत्येक दिन
  • प्रतिवर्ष =हर वर्ष
  • आजन्म = जन्म से लेकर
  • यथासाध्य = जितना साधा जा सके / साध्य के अनुसार 
  • धडाधड = धड-धड की आवाज के साथ
  • घर-घर = प्रत्येक घर
  • रातों रात = रात ही रात में
  • बार बार – बहुत बार
  • आमरण = म्रत्यु तक
  • यथाकाम = काम के अनुसार / इच्छानुसार
Samas in hindi aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran
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ब – बहुब्रीहि समास : Samas In Hindi – grammar in hindi

जिस समास में आये पदों से किसी अन्य अर्थ की अभिव्यक्ति होती है उसे बहुब्रीहि समास कहते है .

जैसे : दशानन, पीताम्बर

बहुव्रीहि समास के उदाहरण (bahuvrihi samas ke example)

  • गजानन = गज का आनन है जिसका (गणेश)
  • त्रिनेत्र =तीन नेत्र हैं जिसके (शिव)
  • नीलकंठ =नीला है कंठ जिसका (शिव)
  • लम्बोदर = लम्बा है उदर जिसका (गणेश)
  • दशानन = दश हैं आनन जिसके (रावण)
  • चतुर्भुज = चार भुजाओं वाला (विष्णु)
  • पीताम्बर = पीले हैं वस्त्र जिसके (कृष्ण)
  • चक्रधर=चक्र को धारण करने वाला (विष्णु)
  • वीणापाणी = वीणा है जिसके हाथ में (सरस्वती)
  • स्वेताम्बर = सफेद वस्त्रों वाली (सरस्वती)

बहुव्रीहि समास के प्रकार/भेद (bahuvrihi samas ke prakar/bhed) Samas in hindi aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran

  1. समानाधिकरण बहुब्रीहि समास
  2. व्यधिकरण बहुब्रीहि समास
  3. तुल्ययोग बहुब्रीहि समास
  4. व्यतिहार बहुब्रीहि समास
  5. प्रादी बहुब्रीहि समास

समानाधिकरण बहुब्रीहि समास (samanadhikaran bahuvrihi samas)

इसमें सभी पद कर्ता कारक की विभक्ति के होते हैं लेकिन समस्त पद के द्वारा जो अन्य उक्त होता है ,वो कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, सम्बन्ध, अधिकरण आदि विभक्तियों में भी उक्त हो जाता है उसे समानाधिकरण बहुब्रीहि समास कहते हैं। जैसे-

  • प्राप्त है उदक जिसको = प्रप्तोद्क
  • जीती गई इन्द्रियां हैं जिसके द्वारा = जितेंद्रियाँ
  • दत्त है भोजन जिसके लिए =दत्तभोजन
  • निर्गत है धन जिससे = निर्धन
  • नेक है नाम जिसका = नेकनाम
  • सात है खण्ड जिसमें = सतखंडा

व्यधिकरण बहुब्रीहि समास  (vyadhikaran bahuvrihi samas)

समानाधिकरण बहुब्रीहि समास में दोनों पद कर्ता कारक की विभक्ति के होते हैं लेकिन यहाँ पहला पद तो कर्ता कारक की विभक्ति का होता है लेकिन बाद वाला पद सम्बन्ध या फिर अधिकरण कारक का होता है उसे व्यधिकरण बहुब्रीहि समास कहते हैं। जैसे-

  • शूल है पाणी में जिसके = शूलपाणी
  • वीणा है पाणी में जिसके = वीणापाणी

तुल्ययोग बहुब्रीहि समास (tulog bahuvrihi samas)

जिसमें पहला पद ‘सह’ होता है वह तुल्ययोग बहुब्रीहि समास कहलाता है। इसे सहबहुब्रीहि समास भी कहती हैं। सह का अर्थ होता है साथ और समास होने की वजह से सह के स्थान पर केवल स रह जाता है। इस समास में इस बात पर ध्यान दिया जाता है की विग्रह करते समय जो सह दूसरा वाला शब्द प्रतीत हो वो समास में पहला हो जाता है। जैसे –

  • जो बल के साथ है = सबल
  • जो देह के साथ है = सदेह
  • जो परिवार के साथ है = सपरिवार

व्यतिहार बहुब्रीहि समास (vyatihar bahuvrihi samas)

जिससे घात या प्रतिघात की सुचना मिले उसे व्यतिहार बहुब्रीहि समास कहते हैं। इस समास में यह प्रतीत होता है की ‘ इस चीज से और उस चीज से लड़ाई हुई। जैसे –

  • मुक्के-मुक्के से जो लड़ाई हुई = मुक्का-मुक्की
  • बातों-बातों से जो लड़ाई हुई = बाताबाती

प्रादी बहुब्रीहि समास (pradi bahuvrihi samas)

जिस बहुब्रीहि समास पूर्वपद उपसर्ग हो वह प्रादी बहुब्रीहि समास कहलाता है। जैसे-

  • नहीं है रहम जिसमें = बेरहम
  • नहीं है जन जहाँ = निर्जन

त- तत्पुरुष समास : Samas In Hindi – grammar in hindi

इस समास में आप को कारक से शब्दोंको अलग करना होगा. जिन सामासिक शांदों का दूसरा शब्द प्रधान हो तथा कारकों की विभक्तियाँ लुप्त हो उन्हें तत्पुरुष समास कहते है.

कारक चिन्ह: karak shabd

कर्ता ने संबंध का, को, के
कर्म को संप्रदान के लिए
करण से संबोधन अरे, अरि
अपादान अपादान अधिकरण में, पर
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जैसे : डाकघर, स्वर्गवासी

  • देश के लिए भक्ति = देशभक्ति
  • राजा का पुत्र = राजपुत्र
  • शर से आहत = शराहत
  • राह के लिए खर्च = राहखर्च
  • तुलसी द्वारा कृत = तुलसीदासकृत
  • राजा का महल = राजमहल

ये ६ प्रकार का होता है – Samas in hindi aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran

  1. कर्म तत्पुरुष समास
  2. करण तत्पुरुष समास
  3. सम्प्रदान तत्पुरुष समास
  4. अपादान तत्पुरुष समास
  5. सम्बन्ध तत्पुरुष समास
  6. अधिकरण तत्पुरुष समास

कर्म तत्पुरुष समास (karm tatpurush samas)

इसमें दो पदों के बीच में कर्मकारक छिपा हुआ होता है। कर्मकारक का चिन्ह ‘को’ होता है। को’ को कर्मकारक की विभक्ति भी कहा जाता है। उसे कर्म तत्पुरुष समास कहते हैं।

कर्म तत्पुरुष समास के उदाहरण (karm tatpurush samas ke udaharan)

  • रथचालक = रथ को चलने वाला
  • ग्रामगत = ग्राम को गया हुआ
  • माखनचोर =माखन को चुराने वाला
  • वनगमन =वन को गमन
  • मुंहतोड़ = मुंह को तोड़ने वाला
  • स्वर्गप्राप्त = स्वर्ग को प्राप्त
  • देशगत = देश को गया हुआ
  • जनप्रिय = जन को प्रिय
  • मरणासन्न = मरण को आसन्न

करण तत्पुरुष समास (karan tatpurush samas)

जहाँ पर पहले पद में करण कारक का बोध होता है। इसमें दो पदों के बीच करण कारक छिपा होता है । करण कारक का चिन्ह य विभक्ति “के द्वारा” और ‘से’ होता है। उसे करण तत्पुरुष कहते हैं।

करण तत्पुरुष समास के उदाहरण (karan tatpurush samas ke udaharan):

  • स्वरचित =स्व द्वारा रचित
  • मनचाहा = मन से चाहा
  • शोकग्रस्त = शोक से ग्रस्त
  • भुखमरी = भूख से मरी
  • धनहीन = धन से हीन
  • बाणाहत = बाण से आहत
  • ज्वरग्रस्त =ज्वर से ग्रस्त
  • मदांध =मद से अँधा
  • रसभरा =रस से भरा
  • भयाकुल = भय से आकुल
  • आँखोंदेखी = आँखों से देखी

सम्प्रदान तत्पुरुष समास (sampradan tatpurush samas)

इसमें दो पदों के बीच सम्प्रदान कारक छिपा होता है। सम्प्रदान कारक का चिन्ह या विभक्ति “के लिए” होती है। उसे सम्प्रदान तत्पुरुष समास कहते हैं।

सम्प्रदान तत्पुरुष समास के उदाहरण (sampradan tatpurush ke udaharan)

  • विद्यालय =विद्या के लिए आलय
  • रसोईघर = रसोई के लिए घर
  • सभाभवन = सभा के लिए भवन
  • विश्रामगृह = विश्राम के लिए गृह
  • गुरुदक्षिणा = गुरु के लिए दक्षिणा
  • प्रयोगशाला = प्रयोग के लिए शाला
  • देशभक्ति = देश के लिए भक्ति
  • स्नानघर = स्नान के लिए घर
  • सत्यागृह = सत्य के लिए आग्रह
  • यज्ञशाला = यज्ञ के लिए शाला
  • डाकगाड़ी = डाक के लिए गाड़ी
  • देवालय = देव के लिए आलय
  • गौशाला = गौ के लिए शाला

अपादान तत्पुरुष समास (apadan tatpurush samas)

इसमें दो पदों के बीच में अपादान कारक छिपा होता है। अपादान कारक का चिन्ह (से) या विभक्ति ‘से अलग’ होता है। उसे अपादान तत्पुरुष समास कहते हैं।

अपादान तत्पुरुष समास के उदाहरण (apadan tatpurush samas ke udaharan):

  • कामचोर = काम से जी चुराने वाला
  • दूरागत =दूर से आगत
  • रणविमुख = रण से विमुख नेत्रहीन = नेत्र से हीन
  • पापमुक्त = पाप से मुक्त
  • देशनिकाला = देश से निकाला
  • पथभ्रष्ट = पथ से भ्रष्ट
  • पदच्युत =पद से च्युत
  • जन्मरोगी = जन्म से रोगी
  • रोगमुक्त = रोग से मुक्त

सम्बन्ध तत्पुरुष समास (sambandh tatpurush samas)

इसमें दो पदों के बीच में सम्बन्ध कारक छिपा होता है। सम्बन्ध कारक के चिन्ह या विभक्ति “का, के, की” होती हैं। उसे सम्बन्ध तत्पुरुष समास कहते हैं।

सम्बन्ध तत्पुरुष समास के उदाहरण (sambandh tatpurush samas ke udaharan)

  • राजपुत्र = राजा का पुत्र
  • गंगाजल =गंगा का जल
  • लोकतंत्र = लोक का तंत्र
  • दुर्वादल =दुर्व का दल
  • देवपूजा = देव की पूजा
  • आमवृक्ष = आम का वृक्ष
  • राजकुमारी = राज की कुमारी
  • जलधारा = जल की धारा
  • राजनीति = राजा की नीति
  • सुखयोग = सुख का योग
  • मूर्तिपूजा = मूर्ति की पूजा
  • श्रधकण = श्रधा के कण
  • शिवालय = शिव का आलय
  • देशरक्षा = देश की रक्षा
  • सीमारेखा = सीमा की रेखा

अधिकरण तत्पुरुष समास (adhikaran tatpurush samas)

इसमें दो पदों के बीच अधिकरण कारक छिपा होता है। अधिकरण कारक का चिन्ह या विभक्ति ‘ में ‘, ‘पर’ होता है। उसे अधिकरण तत्पुरुष समास कहते हैं।

अधिकरण तत्पुरुष समास के उदाहरण (adhikaran tatpurush samas ke udaharan)

  • कार्य कुशल =कार्य में कुशल
  • वनवास =वन में वास
  • ईस्वरभक्ति = ईस्वर में भक्ति
  • आत्मविश्वास = आत्मा पर विश्वास
  • दीनदयाल = दीनों पर दयाल
  • दानवीर = दान देने में वीर
  • आचारनिपुण = आचार में निपुण
  • जलमग्न =जल में मग्न
  • सिरदर्द = सिर में दर्द
  • क्लाकुशल = कला में कुशल
  • शरणागत = शरण में आगत
  • आनन्दमग्न = आनन्द में मग्न
  • आपबीती =आप पर बीती

तत्पुरुष समास के उपभेद (tatpurush samas ke upbhed)

  1. नञ् तत्पुरुष समास
  2. उपपद तत्पुरुष समास
  3. लुप्तपद तत्पुरुष समास

उपपद तत्पुरुष समास

ऐसा समास जिनका उत्तरपद भाषा में स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त न होकर प्रत्यय के रूप में ही प्रयोग में लाया जाता है। जैसे- नभचर , कृतज्ञ , कृतघ्न , जलद , लकड़हारा इत्यादि ।

लुप्तपद तत्पुरुष समास

जब किसी समास में कोई कारक चिह्न अकेला लुप्त न होकर पूरे पद सहित लुप्त हो और तब उसका सामासिक पद बने तो वह लुप्तपद तत्पुरुष समास कहलाता है ।जैसे – 

  • दहीबड़ा – दही में डूबा हुआ बड़ा
  • ऊँटगाड़ी – ऊँट से चलने वाली गाड़ी
  • पवनचक्की – पवन से चलने वाली चक्की आदि ।

नञ तत्पुरुष समास (nav samas in hindi):

इसमें पहला पद निषेधात्मक होता है उसे नञ तत्पुरुष समास कहते हैं।

नञ तत्पुरुष समास के उदाहरण (nav tatpurush samas ke udaharn):

  • असभ्य =न सभ्य
  • अनादि =न आदि
  • असंभव =न संभव
  • अनंत = न अंत

क: कर्मधारय समास: Samas In Hindi – grammar in hindi

जिस समास में पूर्व पद विशेषण या उपमान हो तथा दूसरा पद विशेष्य या उपमेय तथा प्रधान हो उसे कर्मधारय समास कहते है.

जैसे : नीलगाय, कमलनयन

  • चरणकमल = कमल के समान चरण
  • नीलगगन =नीला है जो गगन
  • चन्द्रमुख = चन्द्र जैसा मुख
  • पीताम्बर =पीत है जो अम्बर
  • महात्मा =महान है जो आत्मा
  • लालमणि = लाल है जो मणि
  • महादेव = महान है जो देव
  • देहलता = देह रूपी लता
  • नवयुवक = नव है जो युवक

कर्मधारय समास के भेद (karmdharay samas ke bhed) Samas in hindi aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran

  1. विशेषणपूर्वपद कर्मधारय समास
  2. विशेष्यपूर्वपद कर्मधारय समास
  3. विशेषणोंभयपद कर्मधारय समास
  4. विशेष्योभयपद कर्मधारय समास

विशेषण पूर्वपद कर्मधारय समास:

जहाँ पर पहला पद प्रधान होता है वहाँ पर विशेषणपूर्वपद कर्मधारय समास होता है। जैसे :-

  • नीलीगाय = नीलगाय
  • पीत अम्बर =पीताम्बर
  • प्रिय सखा = प्रियसखा

विशेष्य पूर्वपद कर्मधारय समास

इसमें पहला पद विशेष्य होता है और इस प्रकार के सामासिक पद ज्यादातर संस्कृत में मिलते हैं। जैसे :

  • कुमारी श्रमणा = कुमारश्रमणा

विशेषणोंभयपद कर्मधारय समास –

इसमें दोनों पद विशेषण होते हैं। जैसे :

  • नील – पीत 
  • सुनी – अनसुनी 
  • कहनी – अनकहनी 

विशेष्योभयपद कर्मधारय समास

इसमें दोनों पद विशेष्य होते है। जैसे :-

  • आमगाछ ,वायस-दम्पति।

कर्मधारय समास के उपभेद

  1. उपमानकर्मधारय समास
  2. उपमितकर्मधारय समास
  3. रूपककर्मधारय समास

उपमानकर्मधारय समास:

इसमें उपमानवाचक पद का उपमेयवाचक पद के साथ समास होता है। इस समास में दोनों शब्दों के बीच से ‘ इव’ या ‘जैसा’ अव्यय का लोप हो जाता है और दोनों पद , चूँकि एक ही कर्ता विभक्ति , वचन और लिंग के होते हैं , इसलिए समस्त पद कर्मधारय लक्ष्ण का होता है। उसे उपमानकर्मधारय समास कहते हैं। जैसे :-

  • विद्युत् जैसी चंचला = विद्युचंचला

उपमितकर्मधारय समास:

यह समास उपमानकर्मधारय का उल्टा होता है। इस समास में उपमेय पहला पद होता है और उपमान दूसरा पद होता है। उसे उपमितकर्मधारय समास कहते हैं। जैसे :

  • अधरपल्लव के समान = अधर – पल्लव ,
  • नर सिंह के समान = नरसिंह।

रूपककर्मधारय समास:

जहाँ पर एक का दूसरे पर आरोप होता है वहाँ पर रूपककर्मधारय समास होता है। जैसे :- मुख ही है चन्द्रमा = मुखचन्द्र।

दा: द्विगु समास

जिस समास में प्रथम पद संख्या का बोध कराये व दूसरा पद प्रधान हो उसे द्विगु समास कहते है.

जैसे : दोपहर, चौराहा.

  • नवग्रह = नौ ग्रहों का समूह
  • दोपहर = दो पहरों का समाहार
  • त्रिवेणी = तीन वेणियों का समूह
  • पंचतन्त्र = पांच तंत्रों का समूह
  • त्रिलोक =तीन लोकों का समाहार
  • शताब्दी = सौ अब्दों का समूह
  • पंसेरी = पांच सेरों का समूह
  • सतसई = सात सौ पदों का समूह
  • चौगुनी = चार गुनी
  • त्रिभुज = तीन भुजाओं का समाहार

द्विगु समास के भेद (dvigu samas ke bhed) Samas in hindi aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran

  1. समाहारद्विगु समास
  2. उत्तरपदप्रधानद्विगु समास

समाहारद्विगु समास (samahar dvigu samas)

समाहार का मतलब होता है समुदाय , इकट्ठा होना , समेटना उसे समाहारद्विगु समास कहते हैं। जैसे :

  • तीन लोकों का समाहार = त्रिलोक
  • पाँचों वटों का समाहार = पंचवटी
  • तीन भुवनों का समाहार =त्रिभुवन

उत्तरपदप्रधानद्विगु समास (uttar-pad-pradhan dvigu samas)

उत्तरपदप्रधानद्विगु समास दो प्रकार के होते हैं। अ)- बेटा या फिर उत्पत्र के अर्थ में। जैसे :-

  • दो माँ का =दुमाता
  • दो सूतों के मेल का = दुसूती।

ब)- जहाँ पर सच में उत्तरपद पर जोर दिया जाता है। जैसे :

  • पांच प्रमाण = पंचप्रमाण
  • पांच हत्थड = पंचहत्थड

उदाहरण सहित संधि विग्रह नियम

150 संधि विग्रह हिंदी व्याकरण Sandhi Vigrah Hindi Vyakaran

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Samas aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran

दा: द्वंद्व समास –

– जिस समास में दोनों पद प्रधान हो और उनके बीच “या, अथवा, एवं, तथा” आदि संयोजक लुप्त हो उसे द्वंद्व समास कहते है.

माता – पिता , भाई -बहन

द्वन्द समास उदाहरण (dwand samas ka udharan)

  • जलवायु = जल और वायु
  • अपना-पराया = अपना या पराया
  • पाप-पुण्य = पाप और पुण्य
  • राधा-कृष्ण = राधा और कृष्ण
  • अन्न-जल = अन्न और जल
  • नर-नारी =नर और नारी
  • गुण-दोष =गुण और दोष
  • देश-विदेश = देश और विदेश
  • अमीर-गरीब = अमीर और गरीब

द्वन्द समास के भेद (dwand samas ke prakar) Samas in hindi aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran

  1. इतरेतरद्वंद्व समास
  2. समाहारद्वंद्व समास
  3. वैकल्पिकद्वंद्व समास

इतरेतरद्वंद्व समास (itaretara dvandva)

वो द्वंद्व जिसमें और शब्द से भी पद जुड़े होते हैं और अलग अस्तित्व रखते हों उसे इतरेतर द्वंद्व समास कहते हैं। इस समास से जो पद बनते हैं वो हमेशा बहुवचन में प्रयोग होते हैं क्योंकि वे दो या दो से अधिक पदों से मिलकर बने होते हैं।

इतरेतर द्वंद्व समास के उदाहरण (itaretara dvandva ke udaharan)

  • राम और कृष्ण = राम-कृष्ण
  • माँ और बाप = माँ-बाप
  • अमीर और गरीब = अमीर-गरीब
  • गाय और बैल =गाय-बैल
  • ऋषि और मुनि = ऋषि-मुनि
  • बेटा और बेटी =बेटा-बेटी

समाहार द्वन्द्व समास (samahar dwand samas)

समाहार का अर्थ होता है समूह। जब द्वंद्व समास के दोनों पद और समुच्चयबोधक से जुड़ा होने पर भी अलग-अलग अस्तिव नहीं रखकर समूह का बोध कराते हैं , तब वह समाहारद्वंद्व समास कहलाता है। इस समास में दो पदों के अलावा तीसरा पद भी छुपा होता है और अपने अर्थ का बोध अप्रत्यक्ष रूप से कराते हैं।

समाहार द्वन्द्व समास के उदाहरण (samahar dwand samas ke udaharan)

  • दालरोटी = दाल और रोटी
  • हाथपॉंव = हाथ और पॉंव
  • आहारनिंद्रा = आहार और निंद्रा

वैकल्पिक द्वंद्व समास (vaikalpik dwand samas ke udaharan)

इस द्वंद्व समास में दो पदों के बीच में या,अथवा आदि विकल्पसूचक अव्यय छिपे होते हैं उसे वैकल्पिक द्वंद्व समास कहते हैं। इस समास में ज्यादा से ज्यादा दो विपरीतार्थक शब्दों का योग होता है। जैसे-

  • पाप-पुण्य =पाप या पुण्य
  • भला-बुरा =भला या बुरा
  • थोडा-बहुत =थोडा या बहुत

Samas in hindi aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran

Samas in hindi aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran
Samas in hindi aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran
शब्द विग्रह समास के नाम
यथा संभव  संभव के अनुसार अव्ययीभाव
प्रतिदिन  दिन के अनुसार अव्ययीभाव
भरपेट  पेट भर कर अव्ययीभाव
जल्दी जल्दी  बहुत जल्दी अव्ययीभाव
धीरे  धीरे  बहुत धीरे अव्ययीभाव
राजपुत्र  राज क पुत्र तत्पुरुष
स्वर्ग प्राप्त  स्वर्ग को प्राप्त तत्पुरुष
रसोईघर  – रसोई के लिए घर तत्पुरुष
ग्राम वासी  ग्राम का वासी तत्पुरुष
भारत वासी  भारत का वासी तत्पुरुष
आचार विचार  आचार और विचार  द्वंद्व
माता पिता  माता व् पिता  द्वंद्व
सप्ताह  सात दिनों का समूह  द्विगु
पिता पुत्र  पिता व पुत्र  द्वंद्व
ऊँच नीच  ऊँच या नीच  द्वंद्व
तन मन धन  तन , मन और धन  द्वंद्व
काम काज  काम और काज  द्वंद्व
यथा शीघ्र  जल्दी से जल्दी अव्ययीभाव
आमरण  मरण तक अव्ययीभाव
हर रोज  प्रत्येक दिन अव्ययीभाव
दशानन  दश है आनन जिसके वह बहुव्रीहि
दीप शिखा  दीप की शिखा तत्पुरुष
आपनिती  आप पर नीति तत्पुरुष
रसोई घर  रसोई के लिए घर तत्पुरुष
हरितपूर्ण  हरित है पूर्ण जिसके वह बहुव्रीहि
निर्जन  नही हैं जन जहाँ वह स्थान बहुव्रीहि
अनासक्त  नही है आसकित जिनमें वह बहुव्रीहि
नीलकमल  नीला कमल कर्मधारय
महात्मा  महान आत्मा कर्मधारय
नवयुवक  नव युवक कर्मधारय
अंध विश्वाश  – अँधा विश्वाश कर्मधारय
चौराहा  चार राहों का समूह  द्विगु
त्रिभुज  तिन भुजाओं का समूह  द्विगु
पंचवटी  पांच वटों का समूह  द्विगु
नौरत्न  नौं रत्नों का समूह  द्विगु
हस्त लेख  हाथ से लिखा हुआ कर्मधारय
सेना पति  सेना का पति तत्पुरुष
महारज  महान रजा तत्पुरुष
विद्यालय  विद्या का आलय तत्पुरुष
वचन अमृत  वचन रूपी अमृत तत्पुरुष
कमल नयन  कमल के सामान नयन तत्पुरुष
विद्या धन  विद्या रूपी धन तत्पुरुष
नील गाय  नील रंग की गाय कर्मधारय
अकाल पीड़ित  आकाल से पीड़ित तत्पुरुष
डाक घर  डाक के लिए घर तत्पुरुष
गंगा जल  गंगा का जल तत्पुरुष
दान वीर  दान में वीर तत्पुरुष
दशरथ  दसों दिशाओं में रथ है जिसके वह बहुव्रीहि
गजानन  गज के सामान आनन है जिसके वह बहुव्रीहि
पीतांबर  पिला है अम्बर जिसका वह बहुव्रीहि
नीलकंठ  नीला है कंठ जिसका वह बहुव्रीहि
महादेव  महान देवता कर्मधारय
जन्म भूमि  जन्म के लिए भूमि तत्पुरुष
स्वर्गवासी  स्वर्ग का वासी तत्पुरुष
Samas in hindi aur Samas ke prakar Hindi Vyakaran

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