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Shiv Tandav Stotram lyrics
Ravan Rachit Shiv Tandav Lyrics in Hindi

Title – Shiv Tandav Stotram
Singer – Shankar Mahadevan
Lyrics – Traditional
Language – Sanskrit
Label – Times Music Spirituial
Shiv Tandav Stotram lyrics
शिव तांडव लिरिक्स (रावण रचित) Shiva Panchakshara Stotra
ऐसा बताया जाता है कि जब रावण भगवन शिव के पास जाते है शिव लिंग लेने तब उस समय भगवान् शिव उन्हें नहीं मिलते है, जिसके कारण एक बार रावण ने अपना बल दिखाने के लिए कैलाश पर्वत ही उठा लिया था और जब वह पूरे पर्वत को ही लंका ले जाने लगा तो उसका अहंकार तोड़ने के लिए भोलेनाथ ने अपने पैर के अंगूठे मात्र से कैलाश को दबाकर उसे स्थिर कर दिया.
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इससे रावण का हाथ पर्वत के नीचे दब गया और वह दर्द से चिल्ला उठा – ‘शंकर शंकर’ – जिसका मतलब था क्षमा करिए, क्षमा करिए और वह महादेव की स्तुति करने लगा. इस स्तुति को ही शिव तांडव स्तोत्र कहते हैं. कहा जाता है कि इस स्तोत्र से प्रसन्न होकर ही शिव जी ने लंकापति को ‘रावण’ नाम दिया था.
शिव तांडव स्तोत्र : Shiv Tandav Stotram lyrics | shiv tandav stotram lyrics in sanskrit
जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥
जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।
विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥
धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर-
स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।
कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि
कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥
जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा-
कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।
मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥
सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर-
प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।
भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकः
श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥
ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा-
निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम् ।
सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं
महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥
कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके ।
धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥
नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर-
त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।
निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरः
कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥
प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा-
विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥
अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी-
रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम् ।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं
गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥
जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर-
द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्-
धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल-
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥
दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो-
र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥
कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन्
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन्कदा सुखी भवाम्यहम्॥13॥
निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥
प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम् ॥15॥
इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं
पठन्स्मरन् ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं
विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम ॥16॥
पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं
यः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां
लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥
|| इति शिव तांडव स्तोत्रं संपूर्णम् || shiv tandav stotram lyrics
॥ इति रावणकृतं शिव ताण्डव स्तोत्रं संपूर्णम् ॥ Shiv Tandav Stotram lyrics
अर्थ – benefits of shiv tandav stotram in hindi – Shiv Tandav Stotram lyrics
इसे भी पढने में मन लगेगा, एक बार जरुर पढ़े:
Baith jata hoon mitti pe aksar hindi kavita
ek budha ped aur hamare mata pita एक बुढा पेड़ और हमारे माता पिता
mat kato mat chhal utaro वृक्ष मत काटो मत छाल उतारो
Khud ko aaina dikhana खुद को आइना दिखाना
Shiv Tandav Stotram in English | shiv tandav stotram lyrics
shiv tandav stotram lyrics in hindi and english
Jatatavigalajjala pravahapavitasthale
Galeavalambya lambitam bhujangatungamalikam
Damad damad damaddama ninadavadamarvayam
Chakara chandtandavam tanotu nah shivah shivam
Jata kata hasambhrama bhramanilimpanirjhari
Vilolavichivalarai virajamanamurdhani
Dhagadhagadhagajjva lalalata pattapavake
Kishora chandrashekhare ratih pratikshanam mama
Dharadharendrana ndinivilasabandhubandhura
Sphuradigantasantati pramodamanamanase
Krupakatakshadhorani nirudhadurdharapadi
Kvachidigambare manovinodametuvastuni
Jata bhujan gapingala sphuratphanamaniprabha
Kadambakunkuma dravapralipta digvadhumukhe
Madandha sindhu rasphuratvagutariyamedure
Mano vinodamadbhutam bibhartu bhutabhartari
Sahasra lochana prabhritya sheshalekhashekhara
Prasuna dhulidhorani vidhusaranghripithabhuh
Bhujangaraja malaya nibaddhajatajutaka
Shriyai chiraya jayatam chakora bandhushekharah
Lalata chatvarajvaladhanajnjayasphulingabha
nipitapajnchasayakam namannilimpanayakam
Sudha mayukha lekhaya virajamanashekharam
Maha kapali sampade shirojatalamastunah
Karala bhala pattikadhagaddhagaddhagajjvala
Ddhanajnjaya hutikruta prachandapajnchasayake
Dharadharendra nandini kuchagrachitrapatraka
Prakalpanaikashilpini trilochane ratirmama
navina megha mandali niruddhadurdharasphurat
Kuhu nishithinitamah prabandhabaddhakandharah
nilimpanirjhari dharastanotu krutti sindhurah
Kalanidhanabandhurah shriyam jagaddhurandharah
Praphulla nila pankaja prapajnchakalimchatha
Vdambi kanthakandali raruchi prabaddhakandharam
Smarachchidam purachchhidam bhavachchidam makhachchidam
Gajachchidandhakachidam tamamtakachchidam bhaje
Akharvagarvasarvamangala kalakadambamajnjari
Rasapravaha madhuri vijrumbhana madhuvratam
Smarantakam purantakam bhavantakam makhantakam
Gajantakandhakantakam tamantakantakam bhaje
Jayatvadabhravibhrama bhramadbhujangamasafur
Dhigdhigdhi nirgamatkarala bhaal havyavat
Dhimiddhimiddhimidhva nanmrudangatungamangala
Dhvanikramapravartita prachanda tandavah shivah
Drushadvichitratalpayor bhujanga mauktikasrajor
Garishtharatnaloshthayoh suhrudvipakshapakshayoh
Trushnaravindachakshushoh prajamahimahendrayoh
Sama pravartayanmanah kada sadashivam bhaje
Kada nilimpanirjhari nikujnjakotare vasanh
Vimuktadurmatih sada shirah sthamajnjalim vahanh
Vimuktalolalochano lalamabhalalagnakah
Shiveti mantramuchcharan sada sukhi bhavamyaham
Imam hi nityameva muktamuttamottamam stavam
Pathansmaran bruvannaro vishuddhimeti santatam
Hare gurau subhaktimashu yati nanyatha gatim
Vimohanam hi dehinam sushankarasya chintanam
Shiv Tandav shlok aur usek Arth : Shiv Tandav Stotram lyrics
shiv tandav stotram lyrics पहले श्लोक का अर्थ है :
उनके बालों से बहने वाले जल से उनका कंठ पवित्र है,
और उनके गले में सांप है जो हार की तरह लटका है,
और डमरू से डमट् डमट् डमट् की ध्वनि निकल रही है,
भगवान शिव शुभ तांडव नृत्य कर रहे हैं, वे हम सबको संपन्नता प्रदान करें।
दुसरे श्लोक का अर्थ है :
मेरी शिव में गहरी रुचि है,
जिनका सिर अलौकिक गंगा नदी की बहती लहरों की धाराओं से सुशोभित है,
जो उनकी बालों की उलझी जटाओं की गहराई में उमड़ रही हैं?
जिनके मस्तक की सतह पर चमकदार अग्नि प्रज्वलित है,
और जो अपने सिर पर अर्ध-चंद्र का आभूषण पहने हैं।
महाभारत कथा Mahabharat Katha Lyrics in Hindi
इन सीख देने वाली मोटिवेशन वाली कहानी को पढ़े:
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kachua aur bagula कछुआ और दो बगुले Kachhua Aur do bagule ki kahani
Ek paras Patthar Ki Kahani एक पारस पत्थर
तीसरे श्लोक का अर्थ है :
मेरा मन भगवान शिव में अपनी खुशी खोजे,
अद्भुत ब्रह्माण्ड के सारे प्राणी जिनके मन में मौजूद हैं,
जिनकी अर्धांगिनी पर्वतराज की पुत्री पार्वती हैं,
जो अपनी करुणा दृष्टि से असाधारण आपदा को नियंत्रित करते हैं, जो सर्वत्र व्याप्त है,
और जो दिव्य लोकों को अपनी पोशाक की तरह धारण करते हैं।
चौथेश्लोक का अर्थ है :
मुझे भगवान शिव में अनोखा सुख मिले, जो सारे जीवन के रक्षक हैं,
उनके रेंगते हुए सांप का फन लाल-भूरा है और मणि चमक रही है,
ये दिशाओं की देवियों के सुंदर चेहरों पर विभिन्न रंग बिखेर रहा है,
जो विशाल मदमस्त हाथी की खाल से बने जगमगाते दुशाले से ढंका है।
पांचवे श्लोक का अर्थ है :
भगवान शिव हमें संपन्नता दें,
जिनका मुकुट चंद्रमा है,
जिनके बाल लाल नाग के हार से बंधे हैं,
जिनका पायदान फूलों की धूल के बहने से गहरे रंग का हो गया है,
जो इंद्र, विष्णु और अन्य देवताओं के सिर से गिरती है।
छठे श्लोक का अर्थ है :
शिव के बालों की उलझी जटाओं से हम सिद्धि की दौलत प्राप्त करें,
जिन्होंने कामदेव को अपने मस्तक पर जलने वाली अग्नि की चिनगारी से नष्ट किया था,
जो सारे देवलोकों के स्वामियों द्वारा आदरणीय हैं,
जो अर्ध-चंद्र से सुशोभित हैं।
सातवे श्लोक का अर्थ है :
मेरी रुचि भगवान शिव में है, जिनके तीन नेत्र हैं,
जिन्होंने शक्तिशाली कामदेव को अग्नि को अर्पित कर दिया,
उनके भीषण मस्तक की सतह डगद् डगद्… की घ्वनि से जलती है,
वे ही एकमात्र कलाकार है जो पर्वतराज की पुत्री पार्वती के स्तन की नोक पर,
सजावटी रेखाएं खींचने में निपुण हैं।
आठवे श्लोक का अर्थ है :
भगवान शिव हमें संपन्नता दें,
वे ही पूरे संसार का भार उठाते हैं,
जिनकी शोभा चंद्रमा है,
जिनके पास अलौकिक गंगा नदी है,
जिनकी गर्दन गला बादलों की पर्तों से ढंकी अमावस्या की अर्धरात्रि की तरह काली है।
नौवे श्लोक का अर्थ है :
मैं भगवान शिव की प्रार्थना करता हूं, जिनका कंठ मंदिरों की चमक से बंधा है,
पूरे खिले नीले कमल के फूलों की गरिमा से लटकता हुआ,
जो ब्रह्माण्ड की कालिमा सा दिखता है।
जो कामदेव को मारने वाले हैं, जिन्होंने त्रिपुर का अंत किया,
जिन्होंने सांसारिक जीवन के बंधनों को नष्ट किया, जिन्होंने बलि का अंत किया,
जिन्होंने अंधक दैत्य का विनाश किया, जो हाथियों को मारने वाले हैं,
और जिन्होंने मृत्यु के देवता यम को पराजित किया।
दसवे श्लोक का अर्थ है :
मैं भगवान शिव की प्रार्थना करता हूं, जिनके चारों ओर मधुमक्खियां उड़ती रहती हैं
शुभ कदंब के फूलों के सुंदर गुच्छे से आने वाली शहद की मधुर सुगंध के कारण,
जो कामदेव को मारने वाले हैं, जिन्होंने त्रिपुर का अंत किया,
जिन्होंने सांसारिक जीवन के बंधनों को नष्ट किया, जिन्होंने बलि का अंत किया,
जिन्होंने अंधक दैत्य का विनाश किया, जो हाथियों को मारने वाले हैं,
और जिन्होंने मृत्यु के देवता यम को पराजित किया।
ग्यारहवे श्लोक का अर्थ है :
शिव, जिनका तांडव नृत्य नगाड़े की ढिमिड ढिमिड
तेज आवाज श्रंखला के साथ लय में है,
जिनके महान मस्तक पर अग्नि है, वो अग्नि फैल रही है नाग की सांस के कारण,
गरिमामय आकाश में गोल-गोल घूमती हुई।
बारहवे श्लोक का अर्थ है :
मैं भगवान सदाशिव की पूजा कब कर सकूंगा, शाश्वत शुभ देवता,
जो रखते हैं सम्राटों और लोगों के प्रति समभाव दृष्टि,
घास के तिनके और कमल के प्रति, मित्रों और शत्रुओं के प्रति,
सर्वाधिक मूल्यवान रत्न और धूल के ढेर के प्रति,
सांप और हार के प्रति और विश्व में विभिन्न रूपों के प्रति?
तेरहवे श्लोक का अर्थ है :
मैं कब प्रसन्न हो सकता हूं, अलौकिक नदी गंगा के निकट गुफा में रहते हुए,
अपने हाथों को हर समय बांधकर अपने सिर पर रखे हुए,
अपने दूषित विचारों को धोकर दूर करके, शिव मंत्र को बोलते हुए,
महान मस्तक और जीवंत नेत्रों वाले भगवान को समर्पित?
चौदहव श्लोक का अर्थ है:
देवांगनाओं के सिर में गूंथे पुष्पों की मालाओं के झड़ते हुए सुगंधमय पराग से मनोहर, परम शोभा के धाम महादेवजी के अंगों की सुंदरताएं परमानंद युक्त हमारे मन की प्रसन्नता को सर्वदा बढ़ाती रहें.
पन्द्रहवां श्लोक का अर्थ है:
प्रचण्ड बड़वानल की भांति पापों को भस्म करने में स्त्री स्वरूपिणी अणिमादिक अष्ट महासिद्धियों तथा चंचल नेत्रों वाली देवकन्याओं से शिव विवाह समय में गान की गई मंगलध्वनि सब मंत्रों में परमश्रेष्ठ शिव मंत्र से पूरित, सांसारिक दुःखों को नष्ट कर विजय पाएं.
सोलहवा श्लोक का अर्थ है :
इस स्तोत्र को, जो भी पढ़ता है, याद करता है और सुनाता है,
वह सदैव के लिए पवित्र हो जाता है और महान गुरु शिव की भक्ति पाता है।
इस भक्ति के लिए कोई दूसरा मार्ग या उपाय नहीं है।
बस शिव का विचार ही भ्रम को दूर कर देता है।
सत्रहवां श्लोक का अर्थ है:
प्रात: शिवपुजन के अंत में इस रावणकृत शिव ताण्डव स्तोत्र के गान से लक्ष्मी स्थिर रहती हैं तथा भक्त रथ, गज, घोड़ा आदि संपदा से सर्वदा युक्त रहता है.
शिव ताण्डव स्तोत्रं यह श्लोक Shiv Tandav Stotram lyrics इसप्रकार यह अर्थ व्यक्त करते है
शिव ही अंनत शिव परमानंद है
शिव ही सजल शिव निश्छल है
शिव ही शजर शिव सहर है
शिव ही शिव आठो पहर है! Shiv Tandav Stotram lyrics
शिव ही अमन शिव चमन है
शिव ही अमल शिव कमल है
शिव ही आत्मा शिव परमात्मा है
शिव ही शिव सब में रमा है!
शिव ही रक्षक शिव शिक्षक है
शिव ही रचना शिव संरचना है
शिव ही दानी शिव वाणी है
शिव ही शिव में समस्त प्राणी है!
शिव ही जप शिव तप है
शिव ही भजन शिव नयन है
शिव ही तृप्त शिव समर्पित है
शिव ही शिव चन्नामृत है!
शिव ही शक्ति शिव भक्ति है
शिव ही सती शिव पार्वती है
शिव ही शम्भू शिव शिखर है
शिव ही शिव अजर अमर है!

Origin of Shiv Tandav Stotram | शिव तांडव स्तोत्र की उत्पत्ति | shiv tandav stotram lyrics
रावण भगवान् शिव का परम भक्त था और उनके बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं। एक भक्त को महान नहीं बनना चाहिए, लेकिन वह एक महान भक्त था। वह दक्षिण से कैलाश आये और भगवान् शिव की स्तुति गाने लगे। उनके पास एक ढोल था जिसे वे बजाते थे और छंदों की रचना करते थे, रावण ने 1008 छंदो की रचना की जिसे शिव तांडव स्तोत्रम कहा जाता है।
इस संगीत को सुनकर शिव बहुत प्रसन्न और आसक्त हो गए। जैसे ही उन्होंने गाया, धीरे-धीरे रावण अपने दक्षिणी मुख से कैलाश पर चढ़ने लगा। जब रावण लगभग शीर्ष पर था, और भगवान् शिव अभी भी इस संगीत में तल्लीन थे, तो पार्वती ने इस आदमी को ऊपर चढ़ते देखा।
शीर्ष पर केवल दो लोगों के लिए जगह है! इसलिए पार्वती जी ने शिव को अपने संगीतमय दशा से बाहर लाने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “यह आदमी ऊपर आ रहा है!” लेकिन शिव भी संगीत और काव्य में मग्न थे। फिर अंत में, पार्वती जी महादेव को उस दशा से बाहर निकालने में कामयाब रही, और जब रावण शिखर पर पहुंचा, तो भगवान् शिव ने उसे अपने पैरों से धक्का दे दिया। रावण कैलाश के दक्षिण मुख पर फिसल कर नीचे चला गया।
कहते हैं कि जब वह नीचे गिरा तो उसका ड्रम उसे पीछे खींच रहा था और उसने नीचे पहाड़ पर एक खांचा छोड़ दिया। यदि आज भी आप कैलाश पर्वत को दक्षिण की ओर से देखते हैं, तो आप देखेंगे कि केंद्र में एक रेखा जैसा निशान है जो सीधे नीचे जाता है।
देवाधिदेव, महादेव, आदिदेव, औघड़नाथ, भोलेनाथ की महिमा अपरंपार है. आज महाशिवरात्रि है. देवाधिदेव महादेव के आदि शक्ति माता पार्वती से मिलन की पावन रात्रि… ऐसे काल में दिगदिगंत में ख्यात महापंडित श्री रावणकृतम् शिव तांडव स्तोत्रम् का यह श्लोक मंत्र
Shiv tandav stotram ashutosh rana lyrics in hindi
Ashutosh rana shiv tandav hindi – Shiv Tandav Stotra Hindi
जटाओ से है जिनके जल
प्रवाह मात गंग का,
गले में जिन के सज रहा है
हार विष भुजंग का
डमड्डमड्ड मड्ड डमरु कह रहा शिवः शिवम्,
तरल, अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
सजल लहर भी हो गयी
चपल चपल ललाट पर
धधक रहा है स्वर्ण सा
अनल सकल ललाट पर
ललाट से ही अर्ध चंद्र
कह उठा शिवः शिवम्,
तरल, अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
जो नंन्दनी के वंदनीय,
नंन्दनी स्वरूप है,
वे तीन लोक के पिता,
स्वरूप एक रूप है
क्रपालू ऐसे है के चित्त
जप रहा शिवः शिवम्
तरल,अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
समस्त प्राणियों में उनकी ही
कृपाएं बह रही
भुजंग देवता केशीर्ष मणि प्रभाएँ कह रही
दशा दशा शिवः शिवम् दिशा दिशा शिवः शिवम्,
तरल,अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
वे देव देवताओं के अनादि से गढ़े हुए
समक्ष उनके धूल पुष्प शीर्ष पर चढ़े हुए
विभिन्न कामनाओ के है सम्पदा शिवः शिवम्,
तरल, अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
जो इंद्रा देवता के भी घमंड का दमन करें
जो कामदेव की समस्त कामना दहन करें
वही समस्त सिद्धियां
वही महा शिवः शिवम्,
तरल, अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
विशाल भाल पट्टिका पे
अग्नि वे जलाए हैं
वे भष्म काम देवता के
शीर्ष पर लगाए हैं
है नंदनी के रुप की
तरल छटा शिवः शिवम्,
तरल, अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
नविन श्याम मेघ कंठ
पर सवार घर चले
वही तो बाल चंद्र नाग
गंग शीश धर चले
सकल जगत का भार भी
चले उठा शिवः शिवम्,
तरल,अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
है नील कंठ सौम्य नील पंकजा समान है,
मनुष्य क्या वे देवता के दंड का विधान है
समक्ष उनके काल स्वयं भज रहा शिवः शिवम्,
तरल, अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
सदैव सर्व मंगला कला के शीर्ष देवता
वही विनाश काल है, वही जनक जनन सदा
नमन कृतज्ञ, प्राण यह जपे सदा शिवः शिवम्,
तरल, अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
प्रचंड ताण्डवः प्रभः
स्वयं विलीन देख कर
की नित्य देवता को
नृत्य में प्रलीन देख कर
मृदंग मुग्ध भावना से
कह उठा शिवः शिवम्,
तरल,अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
समक्ष उनके देव जन
का एक ही विधान है
समग्रता में उनकी दृष्टि
एक ही समान है
नमन नमन समानता के देवता शिवः शिवम्,
तरल, अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
है मात्र एक कामना
है मात्र एक वंदना
उन्ही के दर्शनों से पूर्ण
हो सभी उपासना
न जाने कब करेंगे हम पे
यह कृपा शिवः शिवम्,
तरल,अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
चरण को जिनके अप्सराओं
के पराग चूमते
शरण में जिनके इंद्रालोक
और देव झूमते
अनादि से उमंग की परमरा शिवः शिवम्,
तरल, अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
प्रचंड अग्नि से समस्त
पाप कर्म भष्म कर
महान अष्ट सिद्धि से
सभी अधर्म भष्म कर
विजय के मूल मन्त्र की
है साधना शिवः शिवम्,
तरल, अनल,गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
वही अघोर नाथ है
उन्ही से पूर्ण शुद्धता
निहित उनके जाप में
मनुष्यता विशुद्धता
समस्त मोह नाश के हैं
देवता शिवः शिवम्,
तरल, अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
पूजा वसान ध्यान से
करे जो पाठ स्तोत्र का
मुकुट बने वही मनुज
परम विशिष्ट गोत्र का
उसी को देते है समस्
सम्पदा शिवः शिवम्,
तरल, अनल, गगन, पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
वे शेष है, अशेष है, प्रशेष है, विशेष है
जो उनको जैसा धार ले
वो उसके जैसा वेष है
वे नेत्र सूर्य देवता का
चंद्रमा का भाल है,
विलय भी वे प्रलय भी वे,
अकाल,महाकाल है
उसी के नाथ हो गये,
जो उनके साथ हो लिया,
वही के हो गये है वे
जहाँ सुना शिवः शिवम्
डमड्डमड्डमड्ड डमरु
कह रहा शिवः शिवम्,
तरल, अनल, गगन, पवन,धरा धरा शिवः शिवम्
तरल, अनल, गगन,पवन, धरा धरा शिवः शिवम्
हर हर महादेव
Shiv tandav stotram hindi anuvad ashutosh rana lyrics English
Ashutosh rana shiv tandav stotra hindi lyrics
jinakee jataon se jal
pravaah hai maata ganga ka,
jinake gale mein saj raha hai
haar vishaile saamp ka
damaddamadd madd damaroo kah raha shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
sajal lahar bhee ho gayee
chanchal chanchal lalaat par
dhadhak raha hai sone jaisa
agni poore lalaat par
lalaat se hee ardh chandr
kah utha shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
jo nandinee ke vandaneey hain,
nandinee svaroop hain,
ve teenon lokon ke pita hain,
svaroop ek roop hai
krpaalu aise hain ki chitt
jap raha shivah shivam
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
sabhee praaniyon mein unheen kee
krpaen bah rahee hain
saamp devata ke sir kee maniyon kee prabhaen kah rahee hain
dasha dasha shivah shivam disha disha shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
ve dev devataon ke anaadi se gadhe hue hain
unake saamane dhool phool sir par chadhae hue hain
vibhinn kaamanaon ke hain sampada shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
jo indr devata ke bhee ghamand ka daman karen
jo kaamadev kee samast kaamanaen jala den
vahee samast siddhiyaan hain
vahee maha shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
vishaal maathe kee pattee par
agni ve jalae hain
ve bhasm kaamadev ke
sir par lagae hain
hai nandinee ke roop kee
taral chhata shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
naveen shyaam megh kanth
par savaar ghar chale
vahee to baal chandr naag
ganga sir par dhar chale
saare jagat ka bhaar bhee
chale uthaakar shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
he neel kanth saumy neel pankaj ke samaan hain,
manushy kya ve devata ke dand ka vidhaan hain
unake saamane kaal svayan jap raha shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
sadaiv sarv mangala kala ke sheersh devata
vahee vinaash kaal hai, vahee janak janan sada
naman krtagy, praan yah jape sada shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
prachand taandavah prabhah
svayan vileen dekhakar
kee nity devata ko
nrty mein praleen dekhakar
mrdang mugdh bhaavana se
kah utha shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
unake saamane dev jan
ka ek hee vidhaan hai
samagrata mein unakee drshti
ek hee samaan hai
naman naman samaanata ke devata shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
hai maatr ek kaamana
hai maatr ek vandana
unheen ke darshanon se poorn
ho sabhee upaasana
na jaane kab karenge ham pe
yah krpa shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
charan ko jinake apsaraon
ke paraag choomate
sharan mein jinake indralok
aur dev jhoomate
anaadi se umang kee paramara shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
prachand agni se samast
paap karm bhasm kar
mahaan asht siddhi se
sabhee adharm bhasm kar
vijay ke mool mantr kee
hai saadhana shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
vahee aghor naath hain
unheen se poorn shuddhata
nihit unake jaap mein
manushyata vishuddhata
samast moh naash ke hain
devata shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
pooja vasaan dhyaan jo paath stotr ka
mukut bane vahee manushy
param vishisht gotr ka
usee ko dete hain samast
sampada shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
ve shesh hain, ashesh hain, prashesh hain, vishesh hain
jo unako jaisa dhaaran kar le
vo usake jaisa vesh hai
ve netr soory devata ka
chandrama ka bhaal hai,
vilay bhee ve pralay bhee ve,
akaal, mahaakaal hai
usee ke naath ho gaye,
jo unake saath ho liya,
vahee ke ho gaye hain ve
jahaan suna shivah shivam
damaddamaddamadd damaroo
kah raha shivah shivam,
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
taral, anal, gagan, pavan, dhara dhara shivah shivam
har har mahaadev.
FAQ – शिव तांडव स्तोत्र (Ashutosh Rana | Aalok Shrivastav) – Ashutosh rana shiv tandav hindi lyrics
❓1. शिव तांडव स्तोत्र क्या है?
उत्तर: शिव तांडव स्तोत्र भगवान शिव की महिमा का वर्णन करने वाला एक शक्तिशाली संस्कृत स्तोत्र है। इसमें भगवान शिव के तांडव नृत्य, उनकी शक्ति, करुणा और सृष्टि-विनाश की लीला का वर्णन है।
❓2. इस आधुनिक “शिव तांडव” का लेखक कौन है?
उत्तर: इस आधुनिक हिंदी रूपांतरण के गीतकार आलोक श्रीवास्तव हैं, और इसका सशक्त पाठ अभिनेता आशुतोष राणा ने किया है।
❓3. इस स्तोत्र का प्रमुख संदेश क्या है?
उत्तर: यह स्तोत्र हमें बताता है कि भगवान शिव सृष्टि, पालन और विनाश — तीनों के अधिपति हैं। उनके नाम का जाप करने से नकारात्मकता मिटती है और आत्मा में शांति का संचार होता है।
❓4. “तरल, अनल, गगन, पवन, धरा” का क्या अर्थ है?
उत्तर: यह पंचमहाभूतों — जल (तरल), अग्नि (अनल), आकाश (गगन), वायु (पवन) और पृथ्वी (धरा) — का प्रतिनिधित्व करता है। शिव ही इन सभी तत्वों के मूल हैं।
❓5. शिव तांडव स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?
उत्तर: इसे सोमवार, महाशिवरात्रि, या प्रातःकाल में श्रद्धा और ध्यान से पढ़ना सर्वोत्तम माना जाता है। इससे मन शांत और आत्मा शक्तिशाली होती है।
❓6. क्या आशुतोष राणा का यह संस्करण YouTube पर उपलब्ध है?
उत्तर: हाँ, “Hindi Shiv Tandav Stotra | Ashutosh Rana | Aalok Shrivastav” नाम से यह वीडियो चैनल पर उपलब्ध है।
❓7. क्या शिव तांडव स्तोत्र सुनने से लाभ होता है?
उत्तर: जी हाँ, शिव तांडव का श्रवण या पाठ करने से मानसिक तनाव कम होता है, आत्मिक शक्ति बढ़ती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
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Sentences should be crystal clear in terms of its purity & correct pronunciation…
Mujhe es strot se Mili jankari se bahut khush or apke Dura mujhe ye jankari Di eske liye bahut bahut dhanbhad sir