15 august independence day Swatantrata Diwas In Hindi

15 august independence day Swatantrata Diwas in Hindi

15 august independence day
15 august independence day

भारत में 15 august स्वतंत्रता दिवस Independence Day in hindi

भारत को आजाद हुए 73 वर्ष हो गए। आज ही के दिन यानि 15 august 1947 को हम सबका प्यारा देश भारत देश अंग्रजो की परतंत्रता से मुक्ति पाया था। इसलिए हर वर्ष इस राष्ट्रीय पर्व को Swatantrata Diwas, independence day के तौर पर हम भारत वासी मनाते है. 15 august भारत देश के राष्ट्रीय पर्व में से एक है। वैसे भारत का राष्ट्रिय पर्व २६ जनवरी गणतंत्र दिवस भी है।

पुरे भारत वर्ष में यह 15 august independence day Swatantrata Diwas को बढे ही धूम धाम से मनाया जाता है. चारो तरफ राष्ट्रगान, देशभक्ति गीत से पूरा माहौल देश का देश भक्तिमय हो जाता है। जगह जगह ध्वज वंदन किया जाता है. लोग अपने सीने पर ध्वज की पताकाये लगाये घूमते है, बच्चे ध्वज की छोटी छोटी झंडियाँ लेकर बड़े ही मजे से शान से इस पर्व को पुरे हर्शोल्लाश के साथ मनाते है।

Swatantrata Diwas के दिन पूरे भारत में तरह तरह के संस्थाओं, विद्यालयों, कॉलेजों, महाविद्यालयों और अन्य सरकारी, और गैर सरकारी महत्वपूर्ण जगह पर लोग झंडा फहराते हैं। हम भारत के लोग 15 august को भारत को आजादी दिलाने वाले शहीद वीरों को याद करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के दिन सभी भारतीय देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत हो जाते हैं।

Read more : तिरंगे के सम्मान में हर वर्ष सडको पर, गली, यहाँ वहां गिरे हुए हजारों तिरंगे की झंडियाँ को जमा किया है. आप भी हमारे इस मुहीम से जुड़ना चाहते है तो इसे पढ़े.

देश की गुलामी से आजादी की ओर

लार्ड माउंट बेटन के मन में भारत को अभी भी आजाद कराने की इच्छा नहीं थी. परन्तु पुरे भारत वर्ष में आजादी की लडाई इतना उग्र हो गया था जिसे संभालना अंग्रेजो के लिए मुश्किल था। भारत के नेता सी. राजगोपालाचारी द्वारा वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को यह बात बताने पर उसने इंग्लैंड की संसद में 4 जुलाई, 1947 को बिल पारित कर भारत को आजाद कराने की मांग की।

वह विधेयक पास हो गया और भारत को तुरंत आजाद कराने का घोषणा हो चूका था, परन्तु भारत में आजादी के साथ साथ एक और समस्या यह था की यहाँ के मुस्लिम वर्ग अलग देश की माँग करने लगे थे जिसकी अगुवाई जिन्ना कर रहे थे।

15 august independence day
15 august independence day

अंग्रजो ने यह सब से राजी होकर भारत को दो भाग में कर दो अलग देश घोषित कर एक भारत और एक पाकिस्तान नाम से यहाँ के शासन का कार्यभार भारतीयों को सौपकर चले गए।

देश को एक तरफ खुशियाँ थी तो वहीँ इस बात का गम भी की भारत के दो हिस्से हो गए इसलिए तब से १४ अगस्त को पाकिस्तान स्वतंत्रता दिवस मनाता आया है और भारत १५ अगस्त को देश आजदी का जश्न मनाता है। देश का प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी को चुना गया और उसके बाद देश की आजाद की खुशियों को पूरा देश मनाने लगा।

प्रधानमंत्री श्री पंडित जवाहरलाल नेहरू 16 अगस्त 1947 को लाल किले के प्राचीर से झंडोत्तोलन किये। पंडित जवाहरलाल नेहरू जी ने 15 अगस्त १९४७ की रात को देश देश को अपने सन्देश से संबोधित भी किये।

उनके इस संबोधन को ट्रिस्ट विथ डेस्टिनी के नाम से जाना जाता है। तब से लेकर अब तक इसीतरह की परम्परा हर वर्ष देश के प्रधानमंत्री लाल किले से देश को संबोधित करते आ रहे है। लाल किले को सजाया जाता है, आस पास के पुरे इलाके को सुरक्षा व्यवस्था पुक्कता कर दिया जाता है, राजपथ, लाल किला का पूरा प्रांगण में भव्य कर्यक्रम आयोजित किये जाते है. देश विदेशो से बड़े बड़े नेता, उद्योग पति भारत के नागरिक में सामिल होते है। इसके साथ ही सम्मान के रूप में तिरंगे को 21 तोपों की सलामी भी दी जाती है।

देश में १५ अगस्त के दिन का माहौल

इस दिन राष्ट्रिय आवकाश होता है, सभी सरकारी, गैर सरकारी, विद्यालय, महाविद्यालय आदि बंद रहते है. जगह जगह  के संस्थाओं, विद्यालयों, कॉलेजों, महाविद्यालयों और अन्य सरकारी, और गैर सरकारी महत्वपूर्ण जगह पर लोग झंडा फहराते हैं। जगह जगह सांस्क्रतिक कार्यक्रम किये जाते है। खासकर विद्यालयों, कॉलेजों, महाविद्यालयों में बच्चों द्वारा देशभक्ति भाषण, गीत, डांस, परेड, किये जाते है, जिसे देख मन में देशभक्ति की भावना एक नए उफान पर रहता है।

बच्चे तिरंगे वाले शर्ट, टी-शर्त, या अन्य नए कपडे पहन कर देश की इन खुशियों को और भी मजे से मस्ती में रंगे रहते है. जगह जगह चाकलेट, मिठाईयां बांटी जाती है. लोग बड़े ही गर्व से तिरंगे की छोटी छोटी झंडियों को अपने कपडे के जेब पर लगा कर देश के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते है. सुबह से टेलीविजन पर प्रधानमत्री के सन्देश को और लाल किले के कर्यक्रम को दिखाया जाता है. देश भक्ति गीत चलाया जाता है. पूरा भारत देश उत्तर डे दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक देश की आजादी को मनाता है.

15 august independence day
15 august independence day

यह 15 august independence day Swatantrata Diwas हम सभी भारतीय के लिए गर्व का दिन होता है. और शायद ही कोई भारतीय होगा जिसे इस पर्व पर गर्व न हो! गर्व क्यों न हो? क्या आपको गर्व नहीं है? इस आजादी, स्वतंत्रता को पाने के लिए बड़े जवान, बूढ़े, नेता, बच्चे, महिलाये सबने अपना सब कुछ देश की आजादी में न्योछावर कर दिया।

देशभक्ति से ओतप्रोत कविता आचार्य प्रवर स्व. पंडित गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ उन्नाव के हड़हा के रहने वाले, देश प्रेम पर क्या विचार व्यक्त किये है-

जिसको न निज गौरव तथा नीज देश का अभिमान हो,

वह नर नहीं पशु निरा वह मृतक के समान है

जो भरा नहीं भावों से

बहती जिसमें रसधार नहीं,

वह हृदय नहीं है पत्थर है,

जिसमे स्वदेश का प्यार नहीं’।

न जाने कितने देश के वीरों ने अपनी जान की परवाह किये बिना देश हित राष्ट्र हित में आपनी जान दे दिए। तो क्यों न गर्व हो हमें!

15 august independence day
15 august independence day

इस दिन सभी लोग अपने धर्म, जाति से परे हो कर अपनी एकता की पहचान पुरे विश्व के समाज को देते हुए एक साथ तिरंगे फहराने आते हैं। इस दिन दिल्ली के लाल किले पर देश के प्रधानमन्त्री तिरंगा फहराते नजर आते हैं और उसके बाद पुरे भारत के लोगो को अपने भाषण के द्वारा संबोधन करते है, अपने भाषण में देश की अपेक्षा, उपलब्धि और भविष्य भारत देश की तरह अग्रसर होगा यह बताते है।

इस दिन देश की राजधानी दिल्ली के राजमार्ग पर एक अनोखी छटा देखोने को मिलता है कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में भारतीय सेना जल सेना, थल सेना और वायु सेना के जवान अपने करतब दिखाते हैं।

15 august independence day
15 august independence day Credit: pinterest.com

पूरा का पूरा लाल किला और उसका प्रांगण तरह तरह की झांकियां निकली जाती है, भारत की सेना अपना शौर्य और अपनी ताकत को लोगो के समक्ष रखती है, जिसे देख प्रत्येक भारतीय को जरुर गर्व होता होगा। इस शुभ अवसर पर तिरंगे झंडे को 21 तोपों की सलामी दी जाती है।

इस तरह से यह दिन देश भर में स्वतंत्रता दिवस की उमंग के साथ मनाया जाता है। इस साल 15 अगस्त 2020, को भी इसे 74 वां स्वतंत्रता दिवस के रूप में बड़े उत्साह व उमंग के साथ मनाया जायेगा।

15 अगस्त 1947 का दिन

भारत एक सोने की चिड़िया थी, लेकिन समय समय पर भारत पर अलग अलग सत्ता ने अपना अधिकार जमाया जिनमे मुग़ल, अंगराज, डच, फ़्रांसिसी, पुर्तगाली, आदि थे, ए सभी का मकसद भारत को लूटना था, यहाँ के खजाने, यहाँ की कला, संस्कृति, आभूषण, आदि. और उसके बदले ए यहाँ के स्थपतियों को तोड़ दिए, नष्ट कर दिए। जिसके प्रमाण आज भी भारत में देखने को मिलते है। चाहे उसमे विश्व का सबसे बड़ा विश्व विद्ल्यालय नालंदा हो या फिर अंग्रजो के पास अब भी भारत का कोहिनूर का हिरा है।

ए तमाम सत्ताये भारत में व्यापार के बहाने आये, पर भारत के राजाओ में एक जुटता की कमी के कारण भारत बर्बाद हो गया, ऐसा नहीं है भारत के सभी राजा ऐसे थे बहुत से ऐसे राजा थे जो इन सत्ताओं से सामना किये पर कब तक करते भारत के ही बहुत से राजा पैसो, और सत्ता के लालच में इन बाहरी ताकत से हाथ मिला लेते थे और भारत के राजा कमजोर हो जाते।

15 august independence day (6)
15 august independence day (6)

अंग्रेज १७ शताब्दी के करीब वह भी भारत में व्यापार के बहाने ही आया। उनसे पहले भारत में मुगलों का शासन था। इन्होने धीरे धीरे अपना वर्चस्व बढ़ाने लगे। और सैन्य ताकत बढ़ाकर यहाँ के नीतियों को समझने में उन्हें देर नहीं लगा। फिर क्या था, वही जो बाकी की सत्ताओ ने किया वही अंग्रेजो ने भी किया। धीरे धीरे १८ शताब्दी के करीब अंग्रेज पुरे भारत में अपना पैर फैला चुके थे। और भारत को अपने अधीन कर लिया।

अंग्रेजों ने हर भारतीयों का शारीरिक रूप से शोषण ही नहीं बल्कि वे भारतीयों को तरह तरह मानसिक यातनाये दिया करते थे। इस दौरान कई युद्ध भी हुए, जिसमें सबसे प्रमुख था द्वितीय विश्व युद्ध, जिसके लिए अंग्रेज़ों ने भारतियों को सेना में जबरन भर्ती करते लोगो को बीमारी के नाम पर उनके शरीर के खून का कतरा कतरा निकाल लेते थे, उनसे कठोर काम करवाते थे।

अंग्रेजों द्वारा किया गया जलियांवाला बाग जैसे नरसंहार पूरा देश कैसे भूल सकता है. मजदुर और किसानो को कम वेतन में दिन रात काम करवाते थे। किसानो को जबरन कॉफ़ी, चाय, और नील की खेती के लिए प्रताड़ित करते थे, इतना ही नहीं यह करने के बाद भी उनका मेहनताना तक भी नहीं दिया जाता था। बेचारो को कम दामों में ही यह सब बेचना पड़ता था।

इसी कारण इन सब से त्रस्त किसानो ने बिहार के चंपारण में अंग्रजो के खिलाफ जंग छेड़ दिए थे।

ज़िन्दगी जब तुमको समझा, मौत फिर क्या चीज है, ऐ वतन तू‌ ही बता, तुझसे बड़ी क्या चीज है  देश की आन बान शान के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वाले अमर शहीद जवानों को
ज़िन्दगी जब तुमको समझा, मौत फिर क्या चीज है, ऐ वतन तू‌ ही बता, तुझसे बड़ी क्या चीज है देश की आन बान शान के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वाले अमर शहीद जवानों को

पूरे भारत देश में अंग्रजो द्वारा गरीब, असहाय, निर्बल लोगो को प्रताड़ित किया जाने लगा। लोगो पास खुद की जमीं पैसे, और घर सब कुछ होने के बावज़ूद भी इन सब पर भारतीयों का अधिकार नहीं था। खुद के खेत थे पर अपने आजीविका के अनुसार खेती नहीं कर सकते थे। समय समय पर किसान, मजदुर, और क्रांतिकारियों ने अंग्रजो के इन दमनकारी नीतियों का विरोध किये पर अंगराज अपने क्रूर नीतियों से इन्हें ख़त्म कर देते, उन्हें बंदी बना लेते, उन्हें मारते या फिर किसी तरह से कठोर यातनाये देते। और बेचारे भारतीय इन यातनाओ को सहन करते करते मर जाते थे।

समय समय पर लोगो ने राजाओ ने, कुछ क्रांतिकारी, और संगठनों ने आवाज उठाये पर उनमे एकजुटता और ताकत की कमी ने उन्हें कमजोर कर रखा था. यही छोटी छोटी चिंगारी धीरे धीरे उन्नीसवीं शताब्दी में ज्वाला बनाने लगा था, एक ऐसे ज्वाला जो ऐसे विनाशकारी ताकते जो भारत को गुलाम बना रखा था उन्हें नष्ट करने के लिए तैयार हो रही थी।

देश को आजादी में न जाने कितनो वीरों ने क़ुरबानी दी होगी जिसकी गणना करना संभव नहीं है। देश की मिट्टी को सींचने में बच्चा से लेकर औरते बूढ़े सभी ने अपना योगदान दिया होगा। तब जाकर आज हमें यह प्यारी आजादी मिली है।

इन वीरों पर किये गए जुल्मो को जब भी फिल्मो में, इतिहास के पन्नो या फिर किसी से सुने, रोंगटे खड़े हो जायेंगे. यहाँ तक की बच्चों को भी जेल में बंद कर उनपर कोड़े बरसाए जाते थे। आपने चंद्रशेखर आजाद जी की बचपन को वह घटना सुने या पढ़े होंगे, जिसमे इनपर कोड़े बरसाए जाते है और चंद्रशेखर आजाद जी वन्दे मातरम भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे।

15 august independence day (6)
15 august independence day (6)
15 august independence day (6)
15 august independence day (6)

काला पानी की वह सजाये, जिसमे न जाने कितने वीरों, और वीरांगनाओ को रखे गए थे। वहां महीनो उन्हें भूखे रखकर काम करवाया जाता था। उनपर कोड़े से मारा जाता था। यहाँ तक की उन्हें पीने के लिए पानी तक नसीब नहीं होता था उन सब के बावजूद भी उनके दिलों में भारत माता और वन्दे मातरम् बसता था।

ऐसे वीरों को सच में दिल से नमन है।

देश की आजादी में भाग लेने वाले और शहीद हुए लोग

इस आजादी को पाने के लिए अनेक देशभक्तों ने अपना बलिदान दिया है। मंगल पांडेसुभाषचंद्र बोसरामप्रसाद बिस्मिल, राजगुरु, चन्द्रशेखर आजाद,भगतसिंह, रानीलक्ष्मी बाईमहात्मा गांधी जैसे लोगो के बलिदान को हम कभी नही भूल सकते हैं। इस आज़ादी को पाने के लिए हमे लम्बी लड़ाई लड़नी पड़ी है इसलिए हमे इसका पूरा सम्मान करना चाहिये।

इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिसर्च (ICHR)

इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिसर्च (ICHR) डिक्शनरी में शहीद की परिभाषा क्या है?

भारत सरकार द्वारा भारतीय वीरों के लिए एक डिक्शनरी बनायी गयी है जिसमे भारतीयों के शहीद की परिभाषा को गडा गया है. और देश की आजादी में और अबतक जो देश के लिए शहीद हुए है उन उन सभी के नामो का विवरण इस डिक्शनरी में मिलता है और साथ ही साथ इस डिक्शनरी में मार्टर्स यानी शहीद शब्द का इस्तेमाल उस व्यक्ति के लिए किया है जो-

किसी एक्शन या हिरासत में मारे गए या आजादी मांगने के लिए सूली पर चढ़ा दिए गए

इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिसर्च (ICHR)

कितने नाम हैं इस डिक्शनरी में?

बताया जाता है की इस किताब को पांच खंडों में छपी है इस डिक्शनरी में करीब 13,500 शहीदों का ब्यौरे हैं. इसे तैयार करने का कारण यही है की लोग अक्सर शहीदों के बारे में जानना चाहते है परन्तु इनका कोई ब्यौरा नहीं है और नहीं ही कोई सरकरी जानकरी यहाँ तक की एक तक तो कहने वाले यह भी कहते है की भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद को भी शहीद का दर्जा नहीं दिया गया है।

और यही नहीं ऐसे न जाने और भी कितने लोग होंगे जिसकी कल्पना भी करना मुश्किल है जो भारत की आजादी में कुर्बान हुए जन सामान्य लोग, किसान, मजदूर, बाबू गेनू, सुरेश जैसे छोटे छोटे कम उम्र की बच्चे देश की आजादी की लडाई में सामिल थे। यह एक दुर्भाग्य की बात है की हमें उन सब के नाम नहीं पता, और दूसरा बात यह की ऐसे लोगो को सम्मान मिलना चाहिए।

ठीक इसी तरह ऐसी बहुत सी घटनाये है जहाँ सरकार और देश की व्यवस्था चलाने वालों पर प्रश्न उठता रहा है। जिनमे

  • संविधान के निर्माता डा. बाबा साहेब अंबेडकर को भारत रत्न देर से क्यों मिला?
  • भारत के लाल बहादुर शास्त्री को उनका सम्मान उन्हें क्यों नहीं दिया गया, जो की बाकि के नेताओ को मिलता रहा है?
  • भारत के पहले राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद अपने अस्तित्व की लडाई अपने आखिरी वक्त में माँगने पर भी नहीं दिया गया?
  • नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी को अध्यक्ष पद का न मिलना?
  • देश की सेना को तैयार करने में नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी की अहम भूमिका और देश के सबसे बड़े नेता होने के बावजूद भी उनके सम्मान में कमी देखी गयी है?

यह सब आप लोग भी बखूबी जानते है।

ऐसे असंख्य प्रश्न हर भारतीय के मन में एक बार तो जरुर आएगा ही जब वह इतिहास के पन्नो को पलटना शुरू करेगा. और प्रश्न क्यों नहीं उठाना चाहिए? आप इस विषय पर क्या सोचते हो?

देश ही क्या दुनिया भर के लोग ऐसे शहीदों के बारे में जनना चाहते हैं लेकिन कोई खास जानकारी उपलब्ध नहीं थी। और होना भी संभव नहीं है। पहले 1857 से 1947 तक शहीद हुए करीब 14000 शहीदों की पहचान अब तक किया गया। इन सभी शहीदों का आजादी के लिए किया संघर्ष इस डिक्शनरी में दर्ज़ किया गया है. इसके लिए जमीनी सस्तर पर जाकर सभी बातों को जांची गई हैं। इस में विचारधारा और राजनीतिक जुड़ाव को अलग  रखते हुए देश के वीरों के नाम डिक्शनरी में शहीद के रूप  में दर्ज किया गया है।

15 august independence day
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देश की शहीद वीरो के नाम और उनके कुछ देश हित में कार्य

  • वासुदेव बलवंत फड़के, रामोशी, नाइक ने धनगर और भील जातियों को लेकर उन्हें देशहित के लिए एक सुसज्जित सेना बनाई। और आगे चल कर यह लड़ाकू सेना अंग्रेजो के विरुद्ध कई सफल लडाई किये, और सफल भी हुए. अंग्रेजो के नाक में दम कर दिए थे।
  • चाफेकर बंधू : अंग्रेज बीमारी के नाम पर लोगो के शारीर का खून निचोड़ रहे थे तब दामोदर हरि चाफेकर, बालकृष्ण हरि चाफेकर और वासुदेव हरि चाफेकर अत्याचारी प्लेग कमिश्नर मि. रैंड और एक पुलिस अधिकारी मि. आयरिस्ट को गोलियों से हत्या कर डाले, इन चाफेकर बंधूओं को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी भी का संरक्षण प्राप्त था।
  • विदेशो से भारतीयों को मदद पहुँचाना: क्रांतिकारी और संस्कृत के प्रकांड विद्वान् श्यामजी कृष्ण वर्मा ने लंदन ‘इंडिया हाउस’ की स्थापना किये और उसे भारतीय क्रांतिकारियों का केंद्र बना दिए, वहां से भारतीयों विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप दी जाने लगी और क्रन्तिकारीयों को हथियार मुहैया कराने लगे.
  • विनायक दामोदर सावरकर श्यामजी कृष्ण वर्मा सहयोगी थे, इनके कार्यो से परेशान होकर अंग्रेजो ने विनायक दामोदर सावरकर जी दो जन्म का काला पानी की सजा सुनाई।
  • इन्हीं के एक नौजवान साथी मदनलाल धींगरा ने एक अत्याचारी अंग्रेज अफसर को लंदन में गोली मारकर फाँसी का दंड प्राप्त किया।
  • उस समय लंदन में कई भारतीय क्रांतिकारी सक्रिय थे, जिनमें लाला हरदयाल का नाम प्रमुख है।
  • वहाँ मदाम कामा और सरदारसिंह राणा ने क्रांतिकारी संगठन बनाए।
  • गदर पार्टी की स्थापना : संस्थापकों में लाला हरदयाल, सोहनसिंह भकना, भाई परमानंद, पं॰ परमानंद, करतारसिंह सराबा और बाबा पृथ्वीसिंह, चंद्रशेखर आजाद प्रमुख थे। अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध गोपनीय कार्य करने लगे। 
  • अंग्रेजों की सेना में जो भारतीय सेनाए थी उन्हें अपने साथ मिलाकर  देश की आजादी के कार्यो में सामिल करने का काम महान क्रांतिकारी रासबिहारी बोस ने किये। इससे अंग्रजो की सेना में ही भारतीय थे पर काम उनके विरूद्ध करते थे।
  • लेफ्टीनेंट शचींद्रनाथ सान्याल ने समस्त उत्तर भारत में एक सशक्त क्रांतिकारी संगठन बनाए।
  • इस संगठन की सेना के विभागाध्यक्ष रामप्रसाद बिस्मिल थे।
  • भगतसिंह-चन्द्रशेखर आजाद युग : इस वर्ग ने भारत की आजादी के लिए जो प्रयत्न किए वह आगे चलकर नींव का पत्थर साबित हुआ।
  • गाँधी जी द्वारा ‘करो या मरो’ का नारा दिया जा चुका था।
  • भारत के क्रांतिकारी नेता सुभाषचंद्र बोस जी द्वारा देश विदेशों से अहम् जानकरी लेकर भारत की अपनी सेना तैयार किये, जिसे आज हम भारतीय अपनी सेना के रूप में देखते है।
  • बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय
  • सत्यार्थ प्रकाश – स्वामी दयानन्द सरस्वती
  • एस. सर्यमुर्ती
  • अक्काम्मा चेरियन
  • अतुलकृष्ण घोष
  • अनंत लाक्स्मन कान्हरे
  • अनंत सिंह
  • अमरेन्द्रनाथ चटर्जी
  • अम्बिका चक्रबर्ती
  • अरविंद घोष
  • अल्लूरी सीताराम राजू
  • अशफाकुल्ला खान
  • असफ अली
  • आलेख पात्र
  • उधम सिंह
  • उपेन्द्रनाथ बनर्जी
  • उबैदुल्लाह सिन्धी
  • उल्लासकर दत्त
  • एनी मस्कारेने
  • ओम प्रकाश विज
  • कन्हैया लाल दत्ता
  • करतार सिंह सराबा
  • कलि चरण बनर्जी
  • कल्पना दत्त
  • कल्याणी दास
  • कुशल कोंवर
  • कृष्णाजी गोपाल कर्वे
  • कोकेनाथ बाल
  • खुदीराम बोस 
  • गणेश घोष
  • गणेश दामोदर सावरकर
  • गुरन दित्त कुमार
  • चन्द्रशेखर आजाद
  • जतिंद्र नाथ दास
  • जवाहर लाल नेहरू
  • जोगेश चन्द्र चटर्जी
  • जोर्ज जोसफ
  • टी व थॉमस
  • तारकनाथ दास
  • तितुस्जी
  • तोताराम सनाढ्य
  • त्रैलोक्य नाथ चक्रवर्ती
  • दिनेश गुप्ता
  • दुर्गावती देवी
  • पंडित तेजसिंह तिवारी
  • पुलीनबिहारी दास
  • प्रफुल्ला चाकी
  • प्रीतिलता वाद्देदार
  • बटुकेश्वर दत्त
  • बदल गुप्ता
  • बसावन सिंह
  • बाघा जतिन
  • बादल गुप्ता
  • बारीन्द्र कुमार घोष
  • बाल गंगाधर तिलक
  • बिना दस
  • बिनोद बिहारी चौधरी
  • बिपिन चन्द्र पल
  • बिपिन बिहरी गांगुली
  • बेनोय बासु
  • बैकुंठ शुक्ल
  • भगत सिंह
  • भगवती चरण वर्मा
  • भवभूषण मित्र
  • भूपेंद्र कुमार दत्ता
  • मदन लाल धींगरा
  • मधुसुदन दास
  • मंगल पांडे
  • मन्मथ नाथ गुप्ता
  • मातंगिनी हाजरा
  • मोहनदास करम चन्द गांधी
  • मौलवी लियाकत अली
  • यतीन्द्र नाथ दास
  • योगेन्द्र शुक्ल
  • रमेश चन्द्र झा
  • राजगुरु / शिवराम हरि राजगुरु
  • राजेंद्र लाहिरी
  • रानी लक्ष्मीबाई
  • राम प्रसाद बिस्मिल
  • रास बिहारी बोस
  • रासबिहारी बोस
  • रोशन सिंह
  • रोश्म्मा पुन्नूओसे
  • लक्ष्मी बाई
  • लाला लाजपत राय
  • लोकेनाथ बल
  • वन्चिनाथान
  • वासुदेव बलवंत फडके
  • विनय बसु
  • विनायक दामोदर सावरकर
  • वीणा दास
  • वीर भाई कोतवाल
  • वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय
  • शौकत अली
  • श्यामजी कृष्ण वर्मा
  • सचिन्द्र बक्षी
  • सत्येन्द्र नाथ बासु
  • सरदार वल्लभभाई पटेल
  • सिशिला चैन त्रेहन
  • सुखदेव थापर
  • सुबोध रॉय
  • सुभाष चन्द्र बोस
  • सुरेन्द्रनाथ टैगोर
  • सूर्य सेन
  • हेम चन्द्र दास
  • हेमचन्द्र कानूनगो
  • हेमू कालानी

यह तो एक छोटा सा लिस्ट है, ऐसे असंख्य वीर देश की आजादी में शामिल है. यदि आपके पास भी कोई नाम हो तो आप जरुर बताये।

15 august independence day
15 august independence day

जादी के 70 साल बाद देश को मिला शहीद स्मारक जिसमे भारत के हर वह वीरों के नाम अंकित है जो देश के लिए शहीद हुए. यह सम्मान पुरे भारतीयों के लिए गर्व की बात है. देर ही सही पर उन शहीदों को उनका सम्मान लौट रहा है। जिससे देख उन वीरों की शहादत हममें भी देश भक्ति और देश के लिए कुछ करने की इच्छा बनती है।

हमारा देश आज हर क्षेत्र में विकास कर रहा है चाहे वह विज्ञान, साहित्य, प्रौद्योगिकी हो या फिर  परमाणु शक्ति, स्वास्थ्य, खेल, तकनीक जैसे हर क्षेत्र। आज भारत पूरे विश्व में परमाणु शक्ति व विश्व गुरु बनकर उभरा है।

ओलम्पिक, कॉमनवेल्थ, वर्ड कप, ऐशियन खेल और तरह तरह के खेलों का आयोजन हुआ और  विश्वस्तर पर हमारे देश के खिलाडियों का भाग लेकर भारत की गरिमा बढ़ी है। आज दुनिया में हमारी अलग पहचान और सम्मान है।

15 august independence day (6)
15 august independence day (6)

देश के प्रति हमारा कर्तव्य

यह पर्व हमें अमर वीरों के बलिदान के साथ-साथ इतिहास को न भूलने का स्मरण कराता है, जिससे हमें भी देश की तरक्की और देश के विकास में सहयोग देना चाहिए। हमें उन शहीदों, शुर वीरों के प्रति नतमस्तक होकर, श्रद्धा के साथ उन्हें नमन करना चाहिए। उनका सम्मान करना चाहिए जो खुद अपनी जान की परवाह किये बिना हमें यह स्वतंत्रता दिलाई।

हम सब भारतीयों का कर्तव्य बनता है कि ऐसे कार्य करें जिससे हमारे देश का नाम रोशन हो और उससे भी पहले देश को दीमक की तरह नोचने वाले कुछ तत्त्व जैसे अशिक्षा, गरीबी, जुल्म, घुस, जमाखोरी, कालाबाजारी, भ्रष्टाचार इत्यादि को खत्म करना होगा ताकि देश के लिए जिन्होंने अपनी आहुति दी वह व्यर्थ ना जाए।

भले ही हम सबका स्वतंत्रता दिवस को मनाने के तरीके अलग अलग हों पर मकसद देश की उन्नति ही ही होना चाहिए है। सब को मिल-जुल कर देश के लिए जियेंगे और देश के लिए मरेंगे यही भावना हमारे दिलो में हो। देश की एकता, स्वतंत्रता और अखंडता की रक्षा के लिए हम सबको हर समय तैयार रहना चाहिए।

हम सभी भारतीयों को हर उस व्यक्ति का सम्मान करना चाहिए, हर उस माँ, पिता, बहन, भाई, का सम्मान करना चाहिए जिनके बेटे, भाई, देश की सेवा में लगे हुए हैं।

इस देश की आज़ादी दिलाने में न जाने कितने वीर-वीरांगनाओं ने अपने जान गवां दिए है। हमें शहीदों के बलिदान को व्यर्थ नहीं गवांना चाहिए, बल्कि उन्होंने जिस सक्षम, समृद्ध और निर्भर भारत का सपना देखा था हमें उनके सपने को साकार करने का प्रयास करना चाहिए।

जय हिंद! वंदेमातरम्!

भारत माता की जय.


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