Earth Day Essay In Hindi अर्थ डे हिंदी में निबंध

Earth Day Essay In Hindi अर्थ डे हिंदी में निबंध

अर्थ डे को हम पृथ्वी दिवस या विश्व धरती दिवस के नाम से जानते हैं। हर साल 22 अप्रैल को विश्व धरती दिवस अर्थात वर्ल्ड अर्थ डे के रूप में मनाते हैं। इसका उद्देश्य पृथ्वी का संरक्षण तथा पर्यावरण के प्रति सजग रहना है। अर्थ डे मनाने का मकसद है कि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना कि वे धरती का सम्मान करें। और पृथ्वी पर पर्यावरण तथा पारिस्थितिकी तंत्र बनाए रखने में अपना अपना योगदान दें।

अर्थ डे हिंदी में निबंध Earth Day Essay In Hindi
Earth Day Essay In Hindi अर्थ डे हिंदी में निबंध

मै खुश हूँ कि मै ऐसे भविष्य पैदा नहीं हुआ,
जिसमे जंगल ना हो.

अर्थ डे हिंदी में निबंध Earth Day Essay In Hindi

क्लाइमेट चेंज की सारी परेशानी लाइफ स्टाइल से है। हर एक अमेरिकन का लाइफ स्टाइल ऐसा है की वह औसतन हर अमरीकी १८ टन कार्बन डाइऑक्साइड हर वर्ष उपभोग करता है। और वहीँ हर भारतीय औसतन २ टन उपभोग करता है। आज मौसम की मनमर्जी देखते ही बनता है। जिसका उदहारण हम साफ देख सकते है। चाहे वह अमेजोन की जंगलों की आग या फिर ऑस्ट्रेलिया के जंगलों की आग, या फिर भारत की बात की जाये तो बिहार, उड़ीसा, महाराष्ट्र, गुजरात में आने वाली बाढ़ जो एक तबाही की ओर इशारा कर रहे है।

अर्थ डे की शुरुआत अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने 1970 में की थी इसका मकसद था कि अमेरिका में बढ़ते प्रदूषण को रोकने और धरती क्या आवश्यकता से अधिक दोहन को रोकना था अब 192 देशों ने अर्थडे कार्यक्रम को अपनाया है 2009 में संयुक्त राष्ट्र ने 22 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय अर्थ डे के रूप में मनाने की घोषणा की थी हमें यह समझना होगा कि पृथ्वी हमारा घर है और हमें इसकी मांता की तरह सम्मान करना होगा

कि सृष्टि की सभी जरूरतों को केवल धरती माता ही पूरी करती है नदी तालाब झील झरने तथा समुंद्र की पानी की समस्या को दूर करता है इसलिए तो हम कहते हैं कि जल ही जीवन है! जल है तो कल है। जंगल में हर प्रकार की लकड़ियां जिनका उपयोग उद्योग तथा दवाई क्षेत्र में कच्चे माल के रूप में उपयोगी है। फल फूल शहर तथा अनेकों जड़ी बूटियां जंगल से ही प्राप्त होते हैं। और जंगल का चित्र केवल धरती के कारण यह तो सभी जानते हैं।

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हमारा पर्यावरण हमारे रवैये और अपेक्षाओं का आइना होता है.

अर्ल नाइटेंगलइ..
अर्थ डे हिंदी में निबंध Earth Day Essay In Hindi
Earth Day Essay In Hindi अर्थ डे हिंदी में निबंध

आज दुनिया का हर एक व्यक्ति प्राकृतिक संसाधनों को अपने विकास में इस्तेमाल करना चाहता है। और क्यों न करें, परन्तु वह भूल जाता है की एक तरफ यदि प्रकृति हमें कुछ देती है, तो दूसरी तरफ लेना भी जानती है. संसाधनों को उपभोग की वास्तु मानने की शुरुवात ब्रिटेन की औद्योगिकीकरण से और अमेरिकन तक हुआ। जिसके परिणाम नदी, झील, पहाड़, पर्यावरण, सभी को भुगतना पड़ा।

ब्रिटेन के शहरीकरण व सुन्दरता के लिए जंगल काटे गए. यहाँ बड़े बड़े जंगल हुआ करते थे परन्तु आज वहां बंजर पड़ी मैदान दिखाई देता है। और ऐसा नहीं कि सिर्फ ब्रिटेन में हुआ बल्कि दुनिया के लगभग सभी देशों ने अपने आप को विकसित करने के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुँचाया है।

अनेकों प्रकार के खनिज संपदा जैसे सोना, कोयला, हीरा, लोहा, स्टील, एलुमिनियम, पेट्रोल-डीजल, जैसे तमाम खनिजों हमारे जीवन का अभिन्न अंग है वह भी जमीन या समुद्र के तल से ही मिलते हैं। क्या आधुनिक जीवन इन खनिज संपदा के बिना कल्पनीय है? नहीं! पेट्रोल डीजल तथा लौह इस्पात में मानव जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। यातायात व निर्माण कार्य उपजाऊ मिट्टी के कारण कृषि द्वारा हमें अनाज दलहन तिलहन साग सब्जियां मिलती हैं जो सृष्टि के लिए प्राण दायक है।

यह सबसे बड़ा दुर्भाग्य है की पर्यावरण बचाने के लिए हमें अपने ही लोगो से लड़ना पड़ रहा है.

अर्थ डे हिंदी में निबंध Earth Day Essay In Hindi
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क्लाइमेट चेंज

क्लाइमेट चेंज के संकेत जब प्रकृति ने देने शुरू किये तो संयुक्त राष्ट्र ने १९८८ में IPCC का गठन किया। १९९० में एक रिपोर्ट के अनुसार यह बताया गया की यदि प्रदुषण पर रोक नहीं लगाया गया तो २०२० तक वैश्विक तापमान १ अंश सेल्सियस की वृद्धि दर्ज करेगा। और वहीँ २०५० तक यह बढकर ५ अंश सेल्सियस तक जाने की संभावना होगी।

तापमान बढ़ने के कारण ग्रीन हाउस गैस यानि वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का बढ़ाना है। और इसके बढ़ने का कारण मानवीय उपभोग में वृद्धि ही है। इस उपयोग के संसाधनों में तेल, गैस, कोयला जैसे फोसिल फ्यूल यानि कार्बनिक ईधन का उपयोग अँधा धुन बढ़ा है। औद्योगिक करण के समय वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा २८० PPM थी जो अब यह बढ़कर ४४० PPM से भी अधिक हो गया है।

पृथ्वी जब तक शांत है, माँ जैसा प्यार मिलता रहेगा, जब वह विकराल रूप लेगी तब न कोसना….

Website Founder : Sanskar Tutorials :रमेश कहार
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३७ विकसित देश और यूरोपीय समुदाय २००८ से २०१२ के बीच १९९० के कार्बन उत्सर्जन स्तर में ५% की कमी लायेंगे। यह बंधक भारत व चीन पर नहीं लगा जिसके कारण अमेरिका और कनाडा इस प्रोटोकाल से अपने को बहार कर दिया। उस समय तक अमेरिका ग्रीन हाउस गैसों का बड़ा उत्सर्जक था। विकसित देशों को अपनी जीवन शैली को बदलना मुश्किल था अत: उनसे यह आस लगाया गया की वह अपनी पैसे की बदौलत अपनी तकनिकी को और विकसित कर सभी देशो की मदद करें। तो इससे माना जाएगा की वह देश अपने हिस्से के खर्च हुए उर्जा दहन की बराबरी किया है इसे clean development mechanism CDM कहा गया। जिससे इसका फायदा भारत और चीन को भी हुआ।

ओजोन परत की छेद

धीरे सूर्य की परा बैगनी किरणों और धरती पर हो रहे अपार प्रदुषण से अब ओजोन में छेद हो रहे है। जो मानव जाति के लिए भी खतरनाक है। इसे ठीक करने की होड़ में अब सभी विकसित और विकाशील देश लग चौके है। सभी वैज्ञानिको ने ओजोन परत को पुन: ठीक करने के लिए यह तय किये की जंगलों की कटाई पर रोक लगाया जाए। नए जंगल बसाये जाये। कम से कम पेडो की कटाई हो, या फिर पुर्णतः पेड़ो की कटाई पर रोक लगाया जाये। ऐसा करने से वातावरण में आक्सीजन की मात्रा बढेगी, और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में कमी आएगा।

ओजोन क्या है?

ओजोन आक्सीजन के तीन अणु से बना है, और यदि आक्सीजन की मात्रा बढेगी तब आक्सीजन से ओजोन के निर्माण में सहायक साबित होगा। ओजोन की एक पतली परत पृथ्वी के वायुमंडल में फैला हुआ है जो सूर्य की पराबैगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है, जिससे सूर्य की गर्माहट हम तक पहुँचते पहुँचते बहुत हद तक सामान्य प्रकाश और गर्माहट में पहुचाते है। यदि या ओजोन नहीं होता तो शायद पृथ्वी पर सृष्टि आज जैसी है वैसा नहीं होता। और यदि ओजोन पर का छेड़ बढता गया तो पृथ्वी जिव चक्र नष्ट हो जायेगा।

जिसे हर मानव जाति को आगाह हमारी यह प्रकृति कर रही है, इन सब के बावजूद भी किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंग रहा है। यह मानव कल्याण के लिए सबसे बड़ा दुर्भाग्य है।

हमें यह पृथ्वी हमारे पूर्वजों से उत्तराधिकार में नहीं मिला है बल्कि यह हमें हमारी आने वाली पीढ़ी से उधर मिला है. : अमेरिकी कहावत

अर्थ डे हिंदी में निबंध Earth Day Essay In Hindi
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क्या? कोई ऐसा तकनीक है जिससे हम बिन मिट्टी के कृषि पर सकते हैं। तो विज्ञान अभी यहां तक नहीं पहुंचा है एक बात तो तय है कि जिस प्रकार मनुष्य का जन्म मां के घर से होता है। ठीक उसी प्रकार उसका पालन-पोषण और जीवन यापन धरती मां के कारण ही होता है अतः हम दोनों माताओं का सम्मान तथा रक्षा करनी होगी जीवन में हर गतिविधि की एक लक्ष्मण रेखा होती है पिछले 5 दशकों में विश्व समुदाय की जनसंख्या बड़ी तेजी से बढ़ रही है।

आज दुनिया की आबादी लगभग 7.35 अरब से अधिक है। परिणाम यह हो रहा है कि इस विशाल जनसंख्या का बोझ धरती मां के लिए सहन करना असंभव होता जा रहा है इस विशाल जनसंख्या के लिए कृषि कार्य, फलन, निर्माण कार्य बड़े पैमाने पर हो रहा है जिसका दबाव धरती पर अब साफ दिखाई देने लगा है।

अति महत्वाकांक्षा के कारण खनिज संपदा का दोहन हद से ज्यादा देखा जा रहा है। परिणामस्वरूप कुछ खनिज भंडार समाप्त हो गए हैं और कुछ समाप्त होने के कगार पर आ गए हैं यही हाल रहा तो हम अपने आने वाले भावी पीढ़ियों को शायद मुंह दिखाने लायक भी नहीं रहेंगे। खनन कार्य और बेहिसाब अंधाधुन पेड़ कटाई के कारण प्राकृतिक असंतुलन आ गया है।

और विगत 20 वर्षों में इसका भुगतान तमाम प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़, सूखा, जंगलों में आग, महामारी, भुखमरी, पीने के पानी की कमी जैसी समस्या के रूप हम लोग झेल रहे हैं। पेड़ पौधों की कटाई, उद्योग धंधे तथा गाड़ी – मोटर से निकलने वाले गंदे पानी से हमारे वातावरण प्रदूषित होते जा रहे हैं। पीने के पानी की समस्या तथा अशुद्ध हवा के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

ग्लोबल वॉर्मिंग

पूरा विश्व ग्लोबल वॉर्मिंग के संकट से जूझ रहा है अतः हमारी धरती मां खतरे में हैं अब इसे बचाने का समय आ गया है। वरना हम अपनी धरती मां को खो देंगे धरती को बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि यह सभी लोगों की जिम्मेदारी है। पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध शक्ति से लगाना चाहिए और इसका पालन सभी को करना चाहिए

प्लास्टिक का उपयोग कम करते हुए उसके अन्य प्रयायों का उपयोग करना चाहिए क्योंकि प्लास्टिक शीघ्र नष्ट नहीं होता है। और यह मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम कर देती है। अत: प्लास्टिक का उपयोग जितना हो सके कम करना चाहिए और हम सभी को पानी की बूंद बूंद की कीमत समझनी होगी जलाशयों और नदियों को स्वच्छ रखना होगा। जल के दुरुपयोग को टालते हुए हमें इस संपदा को बचाना चाहिए।

और तभी हम बंकिम चंद्र चटर्जी के राष्ट्रगीत : सुजलाम सुफलाम शस्य श्यामला की भावना को साकार कर पाएंगे लेकिन Earth Day अर्थ डे 22 अप्रैल को एक दिन मनाने से धरती मां सुरक्षित नहीं हो सकती बल्कि हर व्यक्ति को अर्थ डे की भावना तथा उद्देश्य को अपने व्यवहारिक जीवन में अपनाना होगा और इसका नियमित पालन करना होगा तभी हम पृथ्वी को बचा पाएंगे और जिव सृष्टि को सुरक्षित रह पाएंगे।

आने वाली पीढ़ी को कुछ देना ही है तो एक सुन्दर स्वस्थ पर्यावरण दे, जिसमे साफ हवा, स्वच्छ जल, सुन्दर पर्यावरण हो.:

रमेश कहार
अर्थ डे हिंदी में निबंध Earth Day Essay In Hindi
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आईये Earth Day से सम्बंधित अतिरिक्त जानकरी को जानते है:

यह नीचे दी गयी जानकारी Earth.org के वेबसाइट से ली गयी है. जिन्हें वह अपने वेबसाइट पर प्रकाशित किये है.

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पृथ्वी दिवस 2020 कब था?
हर साल 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस होता है। 22 अप्रैल, 2020 को पृथ्वी दिवस के 50 साल के रूप में चिह्नित किया गया।

पृथ्वी दिवस 2020 के लिए विषय क्या था?
पृथ्वी दिवस 2020 की थीम जलवायु कार्रवाई थी। भारी चुनौती – लेकिन जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई के विशाल अवसरों ने इस मुद्दे को 50 वीं वर्षगांठ के लिए सबसे अधिक दबाव वाले विषय के रूप में प्रतिष्ठित किया है।

जलवायु परिवर्तन मानवता के भविष्य और जीवन-समर्थन प्रणालियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती का प्रतिनिधित्व करता है जो हमारी दुनिया को रहने योग्य बनाते हैं।

पृथ्वी दिवस का इतिहास क्या है?
पृथ्वी दिवस संकट में एक पर्यावरण के लिए एक एकीकृत प्रतिक्रिया थी – तेल फैल, स्मॉग, नदियाँ इतनी प्रदूषित कि उन्होंने सचमुच आग पकड़ ली।

22 अप्रैल, 1970 को, 20 मिलियन अमेरिकियों – उस समय अमेरिकी आबादी का 10% – पर्यावरण अज्ञानता का विरोध करने और हमारे ग्रह के लिए एक नए रास्ते की मांग करने के लिए सड़कों, कॉलेज परिसरों और सैकड़ों शहरों में ले गया।

पहले पृथ्वी दिवस को आधुनिक पर्यावरण आंदोलन शुरू करने का श्रेय दिया जाता है, और अब इसे ग्रह की सबसे बड़ी नागरिक घटना के रूप में मान्यता दी गई है।

पहले पृथ्वी दिवस का परिणाम क्या था?
1970 में पहले पृथ्वी दिवस ने कार्रवाई की एक लहर शुरू की, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका में ऐतिहासिक पर्यावरण कानूनों को पारित करना शामिल था। 1970 में पहले पृथ्वी दिवस के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के निर्माण के जवाब में स्वच्छ वायु, स्वच्छ जल और लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम बनाए गए थे। कई देशों ने जल्द ही इसी तरह के कानूनों को अपनाया।

पृथ्वी दिवस प्रमुख अंतरराष्ट्रीय महत्व रखता है: 2016 में, संयुक्त राष्ट्र ने पृथ्वी दिवस को उस दिन के रूप में चुना जब जलवायु परिवर्तन पर ऐतिहासिक पेरिस समझौते को लागू किया गया था।

पृथ्वी दिवस 2020 पर क्या हुआ?
पृथ्वी दिवस 2020 पर, हमने अपने जीवन को बदलने और एक दिन के लिए नहीं, बल्कि हमेशा के लिए बदलने के लिए हमारे पास मौजूद सभी उपकरण और क्रियाएं जब्त कर ली हैं।

जबकि कोरोनोवायरस हमें अपनी दूरी बनाए रखने के लिए मजबूर कर सकते हैं, लेकिन इसने हमें अपनी आवाजें कम रखने के लिए मजबूर नहीं किया। दुनिया को बदलने वाली एकमात्र चीज एक नए तरीके से आगे बढ़ने के लिए एक साहसिक और एकीकृत मांग है।

हम अलग हो सकते हैं, लेकिन डिजिटल मीडिया की शक्ति के माध्यम से, हम पहले से कहीं अधिक जुड़े हुए हैं।

22 अप्रैल को, हमने वैश्विक डिजिटल मोबलाइजेशन में 24 घंटे की कार्रवाई को प्रदर्शित किया, जिसने कार्रवाई को बड़ा और छोटा किया, विविध आवाज़ों को एक मंच दिया और लोगों और ग्रह के लिए साहसिक कार्रवाई की मांग की।

Earth Day Essay In Hindi अर्थ डे हिंदी में निबंध
1970
पहला पृथ्वी दिवस हमारे ग्रह के लिए वृद्धि की सुरक्षा के लिए 20 मिलियन अमेरिकियों को जुटाता है

1990
पृथ्वी दिवस वैश्विक हो जाता है, 141 देशों में 200 मिलियन लोग जुटते हैं

2000
पृथ्वी दिवस 180 से अधिक देशों में लाखों स्थानीय वार्तालाप बनाने के लिए डिजिटल मीडिया की शक्ति का लाभ उठाता है

2010
अर्थ डे नेटवर्क ने ए बिलियन एक्ट्स ऑफ़ ग्रीन और द कैनोपी प्रोजेक्ट लॉन्च किया। पृथ्वी दिवस 2010 में 192 देशों में 75,000 वैश्विक साझेदार हैं

2020
पृथ्वी दिवस वैश्विक गतिविधियों के साथ 50 वर्षों को चिह्नित करेगा, जिसका उद्देश्य हमारे ग्रह के लिए परिवर्तनकारी कार्रवाई के लिए दुनिया भर में एक अरब लोगों को जुटाना है

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आपने इस post Earth Day Essay In Hindi अर्थ डे हिंदी में निबंध के माध्यम से बहुत कुछ जानने को मिला होगा। और आपको हमारी दी गयी जानकारी पसंद भी आया होगा. हमारी पूरी कोशिश होगी कि आपको हम पूरी जानकारी दे सके। जिससे आप को जानकारियों को जानने समझने और उसका उपयोग करने में कोई दिक्कत न हो और आपका समय बच सके. साथ ही साथ आप को वेबसाइट सर्च के जरिये और अधिक खोज पड़ताल करने कि जरुरत न पड़े।

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